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दिल्ली कोर्ट का फैसला: ‘कौन से वाले पापा?’ कहना महिला की गरिमा का अपमान, व्यक्ति को धारा 509 के तहत दोषी ठहराया

नई दिल्ली: तीस हजारी अदालत ने एक व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत दोषी करार दिया है। आरोप है कि उसने एक महिला से उसके बच्चे के पिता के बारे में अपमानजनक लहजे में सवाल किया। अदालत ने साफ कहा कि यह कोई साधारण सवाल नहीं था, बल्कि महिला की निष्ठा और बच्चे की पितृत्व पर यौन रूप से अपमानजनक टिप्पणी थी।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मोक्ष बैंस ने 24 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। मामला 23 मार्च 2021 का है। सजा का ऐलान अभी बाकी है।

घटना क्या हुई थी?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 मार्च 2021 को प्रियंका गुप्ता पश्चिम विहार के आरबीआई एन्क्लेव गेट के पास अपनी तीन साल की बेटी के साथ सड़क पर चल रही थीं। बच्ची रो रही थी। मां ने उसे शांत करने के लिए कहा, “देखो पापा आ गए, रोओ मत।”

इसी जगह पर कपड़े प्रेस करने का काम करने वाले गिरधारी लाल सड़क के कोने पर बैठे थे। उन्होंने तुरंत जवाब दिया, “कौन से वाले पापा?”

महिला ने उस समय टिप्पणी को नजरअंदाज किया। बाद में उन्होंने अपने ससुर को बताया। ससुर ने पुलिस को सूचना दी और मामला दर्ज हुआ।

दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई विवाद नहीं था।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे यह साबित कर दिया कि आरोपी ने 23 मार्च 2021 को शिकायतकर्ता के सामने ये शब्द कहे। उसने इन्हें सुनाने का इरादा रखा और महिला की लज्जा भंग करने का उद्देश्य था।

“यह अभिव्यक्ति उस परिस्थिति में महिला से कही गई तो बच्चे के पिता की पहचान का सामान्य सवाल नहीं रह जाती। इसमें स्पष्ट इशारा है कि बच्चे के पिता के रूप में एक से ज्यादा पुरुष हो सकते हैं।”

अदालत ने कहा कि शब्दों का अर्थ सिर्फ उनके शाब्दिक मतलब से नहीं निकलता। वे जिस परिस्थिति में बोले गए, उसी से उनका मतलब तय होता है। यह टिप्पणी महिला के यौन आचरण, वफादारी और बच्चे की पितृत्व पर सवाल उठाती है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर अभद्र या अपमानजनक बात धारा 509 के तहत अपराध नहीं बनती। अपमान का महिला की लज्जा से सीधा संबंध होना चाहिए। इस मामले में वह संबंध साफ दिखा।

शिकायतकर्ता का बयान जिरह में अडिग रहा। धारा 313 सीआरपीसी के तहत आरोपी ने शब्द कहने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि उसका कोई बुरा इरादा नहीं था। अदालत ने इस दलील को नहीं माना।

धारा 509 क्या कहती है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 509 उन शब्दों, इशारों या कार्यों से संबंधित है जिनका उद्देश्य किसी महिला की लज्जा का अपमान करना हो। इसमें मौखिक टिप्पणी भी शामिल है, बशर्ते वह महिला की गरिमा और शालीनता की भावना को ठेस पहुंचाए।

अदालत ने कहा कि ऐसी टिप्पणी महज असभ्यता या हल्की छेड़छाड़ से आगे जाती है। यह महिला की गरिमा और शालीनता की भावना को आहत करने में सक्षम है।

मामले की वर्तमान स्थिति

गिरधारी लाल को दोषी ठहराया जा चुका है। सजा का आदेश अभी पारित नहीं हुआ है। अदालत आगे की सुनवाई में सजा तय करेगी।

यह फैसला उन मामलों की याद दिलाता है जहां अदालतें संदर्भ और आशय को शब्दों के शाब्दिक अर्थ से ज्यादा महत्व देती हैं। महिला की गरिमा से जुड़े मामलों में छोटी लगने वाली बात भी गंभीर अपराध बन सकती है, अगर उसमें यौन अपमान का इशारा हो।

यह रिपोर्ट अदालत के फैसले और विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर आधारित है।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

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