मिर्गी के दौरे में नदी में गिरने से मौत, हाईकोर्ट ने मुआवजे का दावा ठुकराया

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 31अक्टूबर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नदी में डूबकर हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में अनुग्रह राशि देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने(एस्फिक्सिया) का उल्लेख अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि व्यक्ति की मौत पानी में डूबने से हुई। इसके लिए जरूरी मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्य भी होने चाहिए।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने भगवत प्रसाद केंवट की याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता भगवत प्रसाद केंवट के पिता दौराम केंवट9जनवरी2020को सुबह करीब7बजे शौच के लिए नदी किनारे गए थे। उन्हें मिर्गी की बीमारी थी और अचानक दौरे पड़ने के साथ चक्कर आने की समस्या भी रहती थी।
बताया गया कि इसी दौरान उन्हें दौरा पड़ा और वे नदी में गिर गए,जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम किया था।
कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुए पोस्टमार्टम में मौत का कारण दम घुटना यानी डूबना बताया गया था और इसे दुर्घटनाजनित मृत्यु माना गया था।
इसके बाद मृतक के बेटे भगवत प्रसाद ने20फरवरी2020को कसडोल तहसीलदार के समक्ष राज्य सरकार के राजस्व पुस्तक परिपत्र(आरबीसी)के तहत आर्थिक सहायता देने का आवेदन किया था।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पटवारी की जांच रिपोर्ट में घटनास्थल पर करीब तीन फीट गहरा और ठहरा हुआ पानी होने की जानकारी दर्ज थी। याचिका में पिता की मौत को नदी में डूबने से हुई दुर्घटना बताते हुए सरकारी मुआवजे की मांग की गई थी।



