धरमजयगढ़ में 15 नवंबर को गूंजेगा जनजातीय गौरव का संदेश, बिरसा मुंडा जयंती समारोह में पहुंचेंगे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन मुख्य अतिथि के रूप में होंगे शामिल, तैयारियों का जायजा लेने 11 नवंबर को धरमजयगढ़ पहुंचेंगी भाजपा की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ में आगामी 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भव्यता के साथ मनाई जाएगी। इस आयोजन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तैयारियां तेज होने की संभावना है। समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेता के आगमन को देखते हुए इस आयोजन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।समारोह की तैयारियों को लेकर भाजपा संगठन भी पूरी गंभीरता के साथ जुटा हुआ है। इसी कड़ी में भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी आगामी 11 नवंबर को धरमजयगढ़ पहुंचेंगी। उनके प्रस्तावित दौरे का प्रमुख उद्देश्य 15 नवंबर को आयोजित होने वाले बिरसा मुंडा जयंती समारोह की तैयारियों का जायजा लेना और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना है। उनके आगमन को लेकर स्थानीय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।धरमजयगढ़ में आयोजित होने वाला यह समारोह केवल एक राजनीतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनजातीय समाज के गौरव, स्वाभिमान, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी नायकों के योगदान को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर भी होगा। भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष करते हुए जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनका संघर्ष आज भी देशभर के आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन की मौजूदगी और स्मृति ईरानी के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए धरमजयगढ़ का यह आयोजन राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें 11 नवंबर को होने वाली तैयारियों की समीक्षा और 15 नवंबर को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस आयोजन के माध्यम से जनजातीय समाज के बीच भगवान बिरसा मुंडा के विचारों और उनके ऐतिहासिक योगदान को व्यापक स्तर पर सामने रखा जाएगा।कुल मिलाकर, 15 नवंबर को धरमजयगढ़ में होने वाला बिरसा मुंडा जयंती समारोह छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक अस्मिता का एक बड़ा आयोजन बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
