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उत्तर प्रदेश ने पीएम सूर्य घर योजना में 8.76 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट लगाकर गुजरात को पीछे छोड़ा, संचयी इंस्टॉलेशन में देश में प्रथम

लखनऊ: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने 8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर संचयी इंस्टॉलेशन के मामले में गुजरात को पीछे छोड़ दिया है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत संचयी रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश अब देश में प्रथम स्थान पर है।

30 सितंबर 2026 तक उत्तर प्रदेश में 8,67,755 इंस्टॉलेशन दर्ज थे, जबकि गुजरात 8,70,152 इंस्टॉलेशन के साथ मामूली अंतर से आगे था। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में राज्य सरकार ने बताया कि कुल संख्या 8,76,500 पार कर चुकी है और प्रदेश गुजरात से आगे निकल गया है। सितंबर में उत्तर प्रदेश ने 74,796 प्लांट लगाकर मासिक इंस्टॉलेशन में भी देश में पहला स्थान हासिल किया था।

प्रदेश में पिछले कई महीनों से इंस्टॉलेशन की गति तेज रही है। अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, डिस्कॉम स्तर पर निरीक्षण और मीटरिंग की निगरानी, बैंकिंग फॉलोअप, वेंडर समन्वय तथा लंबित प्रकरणों के समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। योजना का राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (यूपीनेडा) देख रही है।

यूपीनेडा ने 8,000 से अधिक वेंडरों को इम्पैनल किया है। राज्य सरकार के अनुसार, बिक्री, डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल कार्य, कमीशनिंग और आफ्टर-सेल्स सर्विस से जुड़े कार्यों में एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बने हैं। जुलाई 2026 में यह आंकड़ा 7,000 से अधिक कंपनियों और करीब 85,000 रोजगार का था। लॉजिस्टिक्स, परिवहन, वेयरहाउसिंग, सामग्री आपूर्ति, स्ट्रक्चर फैब्रिकेशन, सर्वेक्षण और रखरखाव में अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ा है।

राज्य सरकार के मुताबिक, प्रदेश के 15 जनपद देश के शीर्ष 100 में शामिल हैं। लखनऊ संचयी इंस्टॉलेशन में देश के जिलों में प्रथम स्थान पर है। मई 2026 में लखनऊ देश का पहला ऐसा जिला बना था, जहां एक लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लग चुके थे। वाराणसी को राष्ट्रीय स्तर पर दसवें स्थान पर बताया गया है।

स्थापित क्षमता 2,942 मेगावॉट से अधिक

प्रदेश में स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 2,942 मेगावॉट पार कर चुकी है। 30 सितंबर तक यह क्षमता 2,911.39 मेगावॉट थी। 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के मानक पर 2,942 मेगावॉट क्षमता से प्रतिदिन करीब 1.32 करोड़ यूनिट बिजली बन सकती है। 6.50 रुपये प्रति यूनिट के समतुल्य मूल्य पर यह उत्पादन प्रतिदिन 8.5 करोड़ रुपये से अधिक और सालाना 3,100 करोड़ रुपये से अधिक के बराबर बैठता है। ये आंकड़े उत्पादन क्षमता पर आधारित अनुमान हैं, वास्तविक उत्पादन धूप, मौसम और सिस्टम की स्थिति पर निर्भर करता है।

भूमि की बचत और कार्बन उत्सर्जन

रूफटॉप सोलर के लिए अलग से बड़े भू-भाग की जरूरत नहीं पड़ती। 4 एकड़ प्रति मेगावॉट के मानक पर वर्तमान क्षमता से 11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत का अनुमान है। स्वच्छ बिजली उत्पादन के आधार पर सालाना 34 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का भी अनुमान लगाया गया है। वृक्ष-समतुल्यता के रूप में इसे 15 करोड़ से अधिक पेड़ों द्वारा एक वर्ष में अवशोषित कार्बन के बराबर बताया गया है। यह तुलना अनुमानात्मक है।

केंद्र और राज्य की सब्सिडी

राज्य सरकार के अनुसार, योजना के तहत उत्तर प्रदेश में केंद्रीय सब्सिडी 5,722 करोड़ रुपये से अधिक और राज्य सब्सिडी 2,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। अगस्त 2026 में संसद में दिए गए आंकड़ों में उत्तर प्रदेश को जारी केंद्रीय वित्तीय सहायता करीब 4,843 करोड़ रुपये थी। केंद्र और राज्य दोनों की सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर अपेक्षाकृत सुलभ हुआ है।

योजना फरवरी 2024 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य घरों की छत पर सोलर प्लांट लगाकर घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत देना है। राज्य सरकार का कहना है कि 8,76,500 से अधिक प्लांट, 2,942 मेगावॉट से अधिक क्षमता, वेंडर नेटवर्क और सब्सिडी प्रवाह मिलकर प्रदेश में रूफटॉप सोलर को ऊर्जा बचत और रोजगार से जोड़ रहे हैं।

पंकज कुमार वर्मा

एक शांत और सोचने वाले इंसान हैं। घर का माहौल सादगी भरा रहा। वे सुबह जल्दी उठते हैं, अखबार पलटते हैं और दिन भर देखी गई बातों को याद रखते हैं। दोस्तों के साथ बैठक, लंबी सैर और पुरानी फिल्में देखना उनका शौक है। वे दिखावे से दूर रहते हैं और बात को उसके असली रूप में रखना पसंद करते हैं।

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