दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च, कई सांसद हिरासत में, राहुल-प्रियंका आकाशवाणी परिसर में बैठे

नयी दिल्ली, 6 अक्टूबर। विपक्षी इंडिया गठबंधन के घटक दलों के सांसदों ने मंगलवार को संसद मार्ग से निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला, हालांकि पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और कई सांसदों तथा नेताओं को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचने की कोशिश में आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर गए और एक पेड़ के नीचे बैठ गए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करके देश को हाईजैक किया है, जो देशद्रोह है।
उन्होंने यह भी कहा कि इनमें से कोई नहीं बचेगा और सबको कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।
विपक्षी दलों की मांग है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाया जाए और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द किया जाए।
संसद भवन परिसर से निर्वाचन सदन की ओर मार्च निकालने वाले विपक्षी सांसदों को इससे पहले संसद मार्ग पर नीति आयोग भवन के निकट सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया।
निर्वाचन सदन की तरफ बढ़ रहे सांसदों को जब पुलिस ने रोका तो वे संसद मार्ग पर ही धरने पर बैठ गए।
इसके कुछ ही देर बाद राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अभिषेक बनर्जी पुलिस के बैरिकेड पर चढ़ गए, जबकि प्रियंका गांधी को हिरासत में लेने के लिए एक बस में ले जाया गया।
हालांकि, वह जल्द ही बस से उतरकर अपने भाई राहुल गांधी के साथ आकाशवाणी के गेट पर पहुंच गईं।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और दीपेंद्र हुड्डा स्वागत कक्ष वाले गेट से आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर गए। वे एक पेड़ के नीचे बैठ गए।
क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा भी बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं को वहां से हटाने की कोशिश की।
मार्च के दौरान विपक्षी सांसद, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आरएसएस के गणवेश में दर्शाने वाले कटआउट लेकर चल रहे थे। उन्होंने भाजपा ही सीईसी, सीईसी ही भाजपा है, वोट चोर, गद्दी छोड़ और लोकतंत्र बेचना बंद करो जैसे नारे भी लगाए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ज्ञानेश, अब हो गया भाई। इस्तीफा देने का समय आ गया है।
बाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि करीब 300 सांसद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों से मिलने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, पता नहीं, देश में क्या हो रहा है? अगर निर्वाचन आयोग जन प्रतिनिधियों से नहीं मिलेगा तो फिर लोकतंत्र का क्या मतलब है?
गांधी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) क्या कह रही है, इसमें उन्हें दिलचस्पी नहीं है और उनका मकसद लोकतंत्र को बचाने का है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करके देश को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा, नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और भागवत ने वोट चोरी करके देश को हाईजैक किया है। ज्ञानेश कुमार ने इनकी मदद की।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने जो किया है, वह देशद्रोह है।
गांधी ने कहा कि इनमें से कोई नहीं बच पाएगा और सभी जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
मार्च से पहले संसद और निर्वाचन आयोग मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की गई थी। सांसदों के पहुंचने से काफी पहले ही इलाके में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दी गई थी।
विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्र हुए और वहां से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर रवाना हुए।
