छत्तीसगढ़

एफसीआई ने बिल से काटे 2.46 लाख, हाईकोर्ट ने कहा- कटौती का आधार ही नहीं था

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 6अक्टूबर।भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई)द्वारा रायपुर की सूरज बेसन एंड राइस मिल के भुगतान से की गई कटौती को हाईकोर्ट ने गलत ठहराया है। जस्टिस सुषमा सावंत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए निगम को2लाख46हजार960रुपये की मूल राशि वापस करने का आदेश दिया है। हालांकि निचली अदालत द्वारा तय12प्रतिशत सालाना ब्याज को घटाकर6प्रतिशत कर दिया गया है।

अगस्त1998में एफसीआई ने रायपुर के अलग-अलग गोदामों में रखे खराब खाद्यान्न को बेचने के लिए टेंडर जारी किया था। सूरज बेसन एंड राइस मिल ने11,415क्विंटल खराब अनाज के लिए65,38,110रुपये की बोली लगाई थी,जिसे स्वीकार कर लिया गया।

मिल ने जनवरी1999तक तीन किस्तों में पूरी रकम जमा कर दी। बाद में निगम ने भुगतान से कुछ रकम वाणिज्यिक कर और समय पर माल नहीं उठाने के आधार पर काट ली।

मिल का कहना था कि न तो टैक्स की कटौती टेंडर की शर्तों के मुताबिक थी और न ही माल उठाने में देरी के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है,क्योंकि निगम ने पूरी मात्रा समय पर उपलब्ध ही नहीं कराई थी।

कटौती की रकम वापस पाने के लिए मिल ने सिविल मुकदमा दायर किया।29अप्रैल2009को निचली अदालत ने मिल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए2,46,960रुपये और12प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया।

एफसीआई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। निगम का तर्क था कि टेंडर की शर्तों के तहत समय पर भुगतान और माल नहीं उठाने की स्थिति में ब्याज तथा स्टोरेज चार्ज लिया जा सकता था।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एफसीआई की अधिकारी लेखा चटर्जी की जिरह को खास महत्व दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि स्वीकार किए गए टेंडर में वाणिज्यिक कर काटने का कोई प्रावधान नहीं था।

उन्होंने यह भी माना कि काटी गई टैक्स की रकम संबंधित वाणिज्यिक कर विभाग में जमा नहीं की गई थी। कोर्ट ने इसे कटौती की वैधता के खिलाफ महत्वपूर्ण तथ्य माना।

माल उठाने में देरी को लेकर भी निगम का दावा टिक नहीं पाया। निगम की अधिकारी ने स्वीकार किया कि तय मात्रा में माल खुद निगम की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया था।

हाईकोर्ट ने माना कि जब निगम ने ही पूरी मात्रा समय पर उपलब्ध नहीं कराई तो माल उठाने में कथित देरी के लिए मिल के भुगतान से रकम काटना उचित नहीं था।

कोर्ट ने निचली अदालत के मूल रकम लौटाने के आदेश को कायम रखा,लेकिन ब्याज की दर12प्रतिशत से घटाकर6प्रतिशत सालाना कर दी।

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