छत्तीसगढ़

करंट की चपेट में आकर कोटवार की मौत

बिजली विभाग को 10 दिन में भी सुरक्षा की सुध नहीं आई

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 7 अक्टूबर। बिल्हा थाना क्षेत्र के सेवती गांव में बिजली विभाग की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। खेत में टूटकर गिरे 11 केवी बिजली तार की चपेट में आने से गांव के कोटवार कमलदास मणिकपुरी की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि तार टूटने की सूचना विभाग को करीब दस दिन पहले ही दे दी गई थी, लेकिन समय पर सुधार नहीं कराया गया।

विडंबना यह रही कि रविवार को जब बिजली विभाग की टीम तार सुधारने गांव पहुंची, तब खेत में कोटवार का शव पड़ा मिला।

सेवती निवासी कमलदास मणिकपुरी गांव में कोटवार होने के साथ खेती भी करते थे। हाल ही में वह अपनी फसल देखने खेत गए थे। इसी दौरान टूटे हुए बिजली तार की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

परिवार और ग्रामीणों को काफी समय तक उनके साथ हुए हादसे की जानकारी नहीं थी। घर नहीं लौटने पर परिजनों ने 30 सितंबर को पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

रविवार को बिजली विभाग की टीम 11 केवी लाइन में आई खराबी दूर करने सेवती पहुंची। ग्रामीण भी उनके साथ थे। खेत में पहुंचने पर वहां कमलदास का शव दिखाई दिया। ग्रामीणों ने शव की पहचान की और पुलिस को सूचना दी।

बिल्हा पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ग्रामीणों के बयान भी लिए। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली के तार टूटने की शिकायत पहले ही की जा चुकी थी।

ग्रामीणों ने बरतोरी वितरण केंद्र में पदस्थ जूनियर इंजीनियर रोशन श्रीवास की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 31 अगस्त को उनका तबादला सरगांव वितरण केंद्र के लिए हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद वह बरतोरी में ही बने हुए हैं। सेवती गांव भी उनके क्षेत्र में आता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली संबंधी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता और अधिकारी अक्सर मौके पर मौजूद नहीं रहते। उनका कहना है कि यदि टूटे तार की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होती तो कमलदास की जान बच सकती थी।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिजली के तारों से इंसान और जानवरों की मौत रोकने के मामले की सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने बिजली कंपनी की ओर से बनाए गए एसओपी को केवल कागज पर रखने के बजाय जमीन पर लागू करने पर जोर दिया था।

कोर्ट ने ग्रामीण, कृषि और वन क्षेत्रों में बिजली की लाइनों, खंभों, ट्रांसफार्मरों और बिजली बाड़ की नियमित जांच करने तथा किसी भी खतरनाक स्थिति की जानकारी मिलते ही तत्काल सुधार की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button