‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : अमरीका में नशा तस्करी के लिए पड़ोसी देश जिम्मेदार या उनमें जुर्म के लिए अमरीका?
अमरीका अपने अड़ोस-पड़ोस के छोटे-छोटे देशों को नशे की तस्करी में शामिल बताते हुए उन पर फौजी हमले भी कर रहा है, और एक देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति को तो वह अपहरण करके उठाकर ले जा चुका है, उसने वहां पर सत्तापलट भी करवा दिया है, वहां के तेल कारोबार पर भी कब्जा कर लिया है। अब वह अगल-बगल के दूसरे देशों को ऐसी ही धमकियां दे रहा है। लेकिन आज की एक खबर इस पूरी नौबत की हकीकत बताती है। न्यूयॉर्क टाईम्स ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि अमरीका के हाईस्कूल छात्रों, औैर 18-19 साल के नौजवानों ने अमरीका में कानूनी तरीके से हथियार खरीदकर उन्हें मैक्सिको के नशा तस्करों तक पहुंचाने का एक धंधा बना रखा है। इस अखबार ने यह पाया है कि कई हाईस्कूलों के छात्र ऐसे धंधे में लगे हुए हैं। इनमें से कुछ हथियार खरीदी की कानूनी उम्र तक आ गए हैं, कुछ हथियार चोरी करके ले आते हैं, और कुछ दूसरे गैरकानूनी तरीकों से हथियार पाते हैं। अमरीका में 18 बरस की उम्र में लोग घातक हथियार खरीद सकते हैं, और ऐसे नौजवान हथियारों को खरीदकर, उन्हें गैरकानूनी तरीके से तस्करों को बेच देते हैं, और फिर हथियार गुम जाने, या चोरी हो जाने की रिपोर्ट लिखाते हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि यह एक संगठित गिरोह के तहत किया जा रहा है बड़े पैमाने का जुर्म है, और चूंकि कम उम्र किशोरों या युवाओं के जुर्म के रिकॉर्ड नहीं रहते, इसलिए वे यह सब करके भी बच जाते हैं।
खुद अमरीकी सरकार के रिकॉर्ड बताते हैं कि मैक्सिको में सरकार ने जो हथियार जब्त किए, उनमें से जांच के लिए अमरीका भेजे गए करीब 83 हजार हथियारों में से 68 फीसदी का स्रोत अमरीका ही पाया गया। अब सवाल यह उठता है कि अगर अमरीका से हर बरस लाखों अवैध हथियार मैक्सिको जा रहे हैं, तो वहां की सरकार क्या खाकर ऐसे गिरोहों का मुकाबला कर सकेगी? अमरीका में हर किस्म के घातक हथियार खरीदने की छूट हर नागरिक को है, और अमरीकी सरकार के आंकड़े बताते हैं कि वहां मौजूद जानलेवा बंदूकों की संख्या अमरीका की आबादी से अधिक है। इन्हीं बंदूकों में से कुछ को लेकर वहां के नौजवान स्कूलों या दूसरी जगहों पर थोक में कत्ल करते हैं, और आसपास के देशों के नशा तस्करों के हाथ भी मजबूत करते हैं। ऐसे में अगर इंसाफ की बात करें, जो कि आज के ट्रम्प के अमरीका में एक अवांछित बात रह गई है, तो अमरीका पड़ोसी देशों में संगठित माफिया गिरोहों के हाथ मजबूत कर रहा है, और फिर उन पर कार्रवाई के नाम पर उन देशों पर फौजी कार्रवाई भी कर रहा है। यह सिलसिला प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ भी है, लेकिन आज के अमरीका का न्याय से भला क्या लेना-देना रह गया है।
हमने इसी बारे में थोड़ा सा शोध किया, तो पता लगा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प मैक्सिको के नशा तस्कर गिरोहों को अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हैं कि वहां से आने वाला नशा अमरीकी नौजवान पीढ़ी को खत्म कर रहा है। नशे से होने वाले नुकसान की बात तो सही है, लेकिन अमरीका खुद अपनी गैरजिम्मेदार हथियार नीति की वजह से पड़ोसी देशों में अवैध हथियारों का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, और इन हथियारों से नशा तस्कर अपना कारोबार भी करते हैं, और अपने उन देशों में दूसरे किस्म के जुर्म भी करते हैं। अमरीका इसमें से सिर्फ अपनी जमीन तक पहुंचने वाले नशे को देख रहा है, और उसे अमरीका पर दुश्मन कार्रवाई, आतंकी कार्रवाई करार देते हुए उसके खिलाफ हवाई हमले भी कर रहा है, और दूसरे कुछ देशों को भी वह सत्तापलट की धमकी देते रहता है। अमरीका की घरेलू हथियार नीति खुद उसके लिए जानलेवा साबित हो रही है, लेकिन इस देश की सोच बड़ी विचित्र है। एक तरफ तो वह निजी हथियार बनाने वाली कंपनियों के कारोबारी दबावतले रहती है, दूसरी तरफ निजी हथियारों को लेकर अमरीका में यह सोच भी है कि जब तक जनता के पास बड़ी संख्या में हथियार रहेंगे, तब तक अमरीका में किसी फौजी बगावत का कोई खतरा खड़ा नहीं हो सकेगा। अब यह बात साबित होने, या गलत साबित होने की नौबत तो आई नहीं है, लेकिन हथियारों को अमरीकी लोकतंत्र की सुरक्षा की एक गारंटी सरीखा भी माना जाता है, और इस रिपब्लिकन सोच का वहां की दूसरी बड़ी पार्टी, डेमोक्रेटिक पार्टी विरोध भी करती है।
अब हम एक तीसरी बात पर आते हैं जो कि वैध-अवैध हथियारों, और नशे की तस्करी से परे की है। ट्रम्प बरसों से मैक्सिको और अमरीका के बीच की सरहद पर दीवार बनाने की मुनादी करते आ रहा है, और वह यह भी कहते आ रहा है कि इसकी लागत मैक्सिको से ही वसूल की जाएगी। उसने दशकों से अमरीका में रोजाना दाखिल होकर मजदूरी करने वाले मैक्सिकन मजदूरों पर भी रोक लगाई है। नतीजा यह भी हुआ है कि जो लोग दशकों से अमरीका में काम करके रोजी कमा रहे थे, उनमें से बहुत से लोग बेरोजगार हुए हैं, और किसी भी देश में जहां जुर्म अधिक है, वहां बेरोजगारों के जुर्म में शामिल हो जाने का खतरा अधिक रहता ही है। इस तरह अमरीका अपनी मनमानी, और तानाशाह नीतियों के चलते दुनिया के बहुत से देशों में तरह-तरह से बेरोजगारी खड़ी कर रहा है, यह एक अलग बात है कि वहां के लोग अगर जुर्म में शामिल हो रहे हैं, तो वे देश अमरीकी सरहद से बहुत दूर हैं, और उनका नुकसान अमरीका तक अभी सीधे नहीं पहुंच रहा है।



