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सुप्रीम कोर्ट ने UPI पर 0.4% MDR पर रोक लगाने से इनकार किया, केंद्र-RBI से चार हफ्ते में जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से कुछ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होना है। कोर्ट ने केंद्र, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ एडवोकेट अंजन दत्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में 14 सितंबर 2026 की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR ढांचे को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने कार्यान्वयन पर रोक लगाने की भी मांग की थी, जिसे पीठ ने इस चरण में स्वीकार नहीं किया।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कहा कि सरकार इस राशि को वसूल नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि गेटवे का उपयोग करने वाले करीब 96 प्रतिशत लोग इस शुल्क से बाहर रहेंगे। पीठ ने मामले को “कानूनी से ज्यादा तकनीकी” बताया और संबंधित तथ्यों को शपथपत्र पर रखने को कहा। पीठ ने यह भी पूछा कि यह शुल्क कर है या फीस, और इसे लगाने का कार्यकारी आधार क्या है।

नया MDR ढांचा क्या है

सरकार और NPCI के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से निर्धारित पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर लगेगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।

उदाहरण के तौर पर, 3,000 रुपये के योग्य मर्चेंट भुगतान पर 12 रुपये और 50,000 रुपये के भुगतान पर 200 रुपये MDR बनता है। एक लाख रुपये के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत से 400 रुपये बनते, लेकिन 300 रुपये की ऊपरी सीमा लागू होगी।

2,000 रुपये तक के P2M लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन किसी भी राशि पर मुफ्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए UPI QR के जरिए महीने में एक लाख रुपये तक की प्राप्ति पर छूट जारी रहेगी।

रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे निर्धारित क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा। पूंजी बाजार से जुड़े कुछ लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जिसकी सीमा भी 300 रुपये होगी।

आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार यह शुल्क उपभोक्ता से नहीं, संबंधित व्यापारी पक्ष से लिया जाएगा। उपभोक्ता UPI से भुगतान मुफ्त कर सकेंगे और ऐप पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

याचिका में क्या कहा गया है

याचिका में आरोप है कि शुल्क पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिकता पर भी सवाल उठाए हैं। लेनदेन सीमा, दर, ऊपरी सीमा और क्षेत्रों के वर्गीकरण के तरीके को भी चुनौती दी गई है। RuPay डेबिट कार्ड भुगतान के मुकाबले अलग व्यवहार का भी जिक्र है।

याचिका में MDR को रद्द करने या रोकने और स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण में कोई अंतिम राय नहीं दी है। मामला जवाब दाखिल होने के बाद आगे सुना जाएगा। फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाला ढांचा यथावत बना हुआ है।

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