खनिज क्षेत्र में नई दिशा और सख्त निगरानी के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़, पी. दयानंद के नेतृत्व में राजस्व और पारदर्शिता पर जोर।
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे में खनिज संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली का सीधा असर राज्य के राजस्व, औद्योगिक विकास, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इस महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सचिव पी. दयानंद के कार्यकाल में खनिज राजस्व में वृद्धि, खनिज ब्लॉकों की नीलामी, नई खनिज संभावनाओं की खोज तथा अवैध उत्खनन पर निगरानी जैसे विषयों को प्रशासनिक प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की तस्वीर सामने आती है। विभागीय जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने 16,625 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व अर्जित किया, जो निर्धारित वार्षिक लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत रहा और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।इस उपलब्धि को केवल राजस्व संग्रह के आंकड़े के रूप में देखने के बजाय खनिज क्षेत्र में अपनाई जा रही नीतिगत और प्रशासनिक प्रक्रिया के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। पी. दयानंद ने जनवरी 2026 में खनिज विभाग की पत्रकार वार्ता में बताया था कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज पाए जाते हैं और इनके अन्वेषण एवं उत्खनन के लिए खनिज ब्लॉकों को नीलामी तथा अन्य निर्धारित माध्यमों से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ द्वारा लिथियम ब्लॉक की नीलामी करने वाले देश के पहले राज्य के रूप में सामने आने को भी राज्य की बदलती खनिज नीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर रेखांकित किया गया।खनिज क्षेत्र में बढ़ते राजस्व के साथ विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण की भी है। इस मोर्चे पर भी विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने के प्रयास दिखाई देते हैं। अप्रैल 2026 में पी. दयानंद ने रेत आपूर्ति से जुड़े 11 प्रमुख जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर स्वीकृत रेत खदानों से क्षमता के अनुरूप उत्पादन, आम जनता को उचित दर पर रेत उपलब्ध कराने तथा अवैध उत्खनन पर सख्ती के निर्देश दिए थे। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी मुक्त रेत उपलब्ध कराने के निर्देशों के पालन पर भी जोर दिया गया।यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है क्योंकि खनिज विभाग की जिम्मेदारी केवल सरकारी राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है। खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी आवंटन, पर्यावरणीय और वैधानिक प्रावधानों का पालन, उद्योगों को आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी इसकी जिम्मेदारियों का हिस्सा है। पी. दयानंद की अध्यक्षता में अगस्त 2026 में हुई राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड की 26वीं बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 45 उच्च प्राथमिकता वाले खनिज अन्वेषण प्रोजेक्ट तय किए गए, जिनमें 35 महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज ब्लॉक, चार डीप-सीटेड मिनरल ब्लॉक और छह बल्क मिनरल प्रोजेक्ट शामिल हैं।इससे यह संकेत मिलता है कि विभाग की रणनीति केवल मौजूदा खदानों से राजस्व प्राप्त करने तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की खनिज संभावनाओं को तलाशने पर भी केंद्रित है। महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज आने वाले समय में राज्य की औद्योगिक क्षमता तथा देश की खनिज आत्मनिर्भरता के लिए भी उपयोगी हो सकती है। विशेषज्ञ संस्थाओं और केंद्र सरकार से जुड़े भूवैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के साथ समन्वय के माध्यम से अन्वेषण को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।दूसरी ओर, खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी विभाग की दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। केंद्र सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी जानकारी में खनिज संसाधन विभाग के लिए खनिज 2.0 सहित डिजिटल इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने की बात सामने आई है। इससे खनिज प्रशासन में प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं बढ़ती हैं।पी. दयानंद की भूमिका को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। एक ओर राज्य को खनिज संपदा से अधिकतम राजस्व दिलाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर खनिजों के दोहन को नियमों के दायरे में रखते हुए अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण, आम उपभोक्ताओं को आवश्यक खनिज सामग्री उचित दर पर उपलब्ध कराना और स्थानीय उद्योगों की जरूरतों को पूरा करना भी जरूरी है। इन सभी मोर्चों के बीच संतुलन बनाना खनिज प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।विशेष रूप से रेत जैसे लघु खनिजों को लेकर आम जनता की सीधी अपेक्षा रहती है कि निर्माण कार्यों के लिए सामग्री उपलब्ध रहे और उसकी कीमत अनावश्यक रूप से न बढ़े। ऐसे में विभागीय सचिव स्तर से जिलों की नियमित समीक्षा और कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए जाने का महत्व बढ़ जाता है। अप्रैल 2026 की समीक्षा बैठक इसी प्रशासनिक निगरानी की एक मिसाल रही, जिसमें आपूर्ति, उत्पादन और अवैध उत्खनन तीनों पहलुओं को एक साथ देखा गया।वहीं बड़े खनिजों के क्षेत्र में पारदर्शी नीलामी और अन्वेषण के माध्यम से राज्य की दीर्घकालीन आर्थिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। जनवरी 2026 में पी. दयानंद ने लौह अयस्क के उत्खनन में प्राप्त प्रतिस्पर्धी नीलामी दरों को पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया से जोड़ते हुए राज्य के बढ़ते खनिज राजस्व का उल्लेख किया था।कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ के खनिज प्रशासन में मौजूदा दौर की दिशा को तीन प्रमुख आधारों—राजस्व वृद्धि, पारदर्शी प्रक्रिया और सख्त निगरानी—के रूप में देखा जा सकता है। पी. दयानंद के स्तर पर हुई विभागीय समीक्षा, खनिज अन्वेषण की नई योजनाएं, रेत आपूर्ति को लेकर जिलों की निगरानी और रिकॉर्ड खनिज राजस्व जैसे आंकड़े इस प्रशासनिक दिशा को रेखांकित करते हैं। ऐसे में खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ में विभाग के सामने अब चुनौती केवल अधिक खनन की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, पारदर्शी, नियंत्रित और राज्यहित में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की है। यही वह क्षेत्र है जहां आने वाले वर्षों में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली और उसके नेतृत्व की वास्तविक कसौटी तय होगी।
