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इंदौर: वन्यजीव तस्करी मामले में मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज, 33 दुर्लभ कछुए हुए थे जब्त

इंदौर/भोपाल। मध्य प्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएफ) क्षेत्रीय इकाई इंदौर को अंतर्राज्यीय स्तर पर जलीय वन्यजीवों की अवैध तस्करी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर ने इस वन्यजीव अपराध मामले के मुख्य आरोपी कमल मेहता की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़
गौरतलब है कि 19 अगस्त 2026 को स्टेट टाइगर फोर्स इंदौर की टीम ने एक गोपनीय सूचना के आधार पर इंदौर के तीन इमली चौराहे से आरोपी रोहन और केशव को गिरफ्तार किया था। इनके पास से विभिन्न प्रजातियों के 30 जीवित दुर्लभ और प्रतिबंधित कछुए जब्त किए गए थे।
‘श्री पेट शॉप’ पर छापेमारी और जब्ती
आरोपियों से पूछताछ में एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ। इसके बाद कनाडिया रोड स्थित ‘श्री पेट शॉप’ (मुख्य आरोपी कमल मेहता का परिसर) पर छापेमारी की गई। यहां से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-I और II के तहत संरक्षित एक ‘इंडियन स्टार टॉरटॉइस’ और एक ‘रोज रिंग पैराकिट’ पक्षी बरामद किया गया। इस पूरे मामले में अब तक गिरोह के सदस्यों के पास से कुल 33 जीवित दुर्लभ कछुए जब्त किए जा चुके हैं। इस गिरोह के तार मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से जुड़े पाए गए हैं।
एसटीएफ ने न्यायालय में रखा मजबूत पक्ष
मुख्य आरोपी कमल मेहता के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर एसटीएफ ने उसे 23 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। एसटीएसएफ ने न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि आरोपी एक संगठित अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का हिस्सा है। जमानत मिलने पर उसके द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और विवेचना को प्रभावित करने की प्रबल संभावना है।
मामले में दुर्लभ वन्यजीवों की अंतर्राज्यीय तस्करी की गंभीरता और प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता को देखते हुए, जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर ने 28 सितंबर 2026 को आरोपी कमल मेहता की जमानत याचिका निरस्त कर दी। एसटीएफ द्वारा मामले की सघन विवेचना जारी है।



