भारत ने Su-57 पर अभी फैसला नहीं लिया, रूस का ऑफर जारी; सरकार AMCA पर फोकस कर रही है

रूस भारत को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट सुखोई Su-57 और उसके एक्सपोर्ट वर्जन Su-57E की पेशकश लगातार कर रहा है। इसमें सीधी खरीद, भारत में लाइसेंस के तहत उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ट्विन-सीट वर्जन का विकल्प शामिल है। भारतीय सरकार ने फिलहाल इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में साफ कहा कि वैश्विक स्रोतों से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान शामिल करने पर सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि इस समय देश का मुख्य कार्यक्रम स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA ही है।
रूस क्या ऑफर कर रहा है
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत मास्को के अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि रूस भारत के साथ Su-57 को संयुक्त रूप से विकसित और तैयार करने को तैयार है। प्रस्ताव में शुरुआती तैयार विमानों की सप्लाई, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक प्लांट में उत्पादन, इंजन और रडार जैसी तकनीक साझा करना, भारतीय हथियारों का इंटीग्रेशन और सोर्स कोड तक पहुंच की बात कही गई है।
रूस ने हाल में ट्विन-सीट Su-57D का भी जिक्र किया है। रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव के अनुसार यह वर्जन भारत की पुरानी जरूरत के अनुरूप विकसित किया गया है। यह विमान मई 2026 में पहली उड़ान भर चुका है और परीक्षण चल रहा है।
भारत क्यों जल्दबाजी नहीं कर रहा
भारत और रूस के बीच पहले पांचवीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट यानी FGFA कार्यक्रम पर लंबी बातचीत हुई थी। 2018 में भारत उस कार्यक्रम से बाहर हो गया था। उस समय लागत, वर्कशेयर, स्टील्थ क्षमता और तकनीक के स्तर को लेकर मतभेद रहे थे।
सरकार का वर्तमान रुख स्वदेशी क्षमता बढ़ाने का है। AMCA को देश का मुख्य पांचवीं पीढ़ी का विमान माना जा रहा है, हालांकि इसके सेवा में आने का समय अभी 2030 के दशक के मध्य के आसपास बताया जाता है। इसी बीच भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन स्तर पर कमी और चीन के जे-20 जैसे प्लेटफॉर्म से तुलना का दबाव भी बना हुआ है।
इसलिए सरकार इंटरिम खरीद, मौजूदा Su-30MKI फ्लीट के अपग्रेड और स्वदेशी कार्यक्रम के बीच संतुलन देख रही है। रूस बड़ी संख्या में स्थानीय उत्पादन चाहता है, जबकि भारत सीमित संख्या और शर्तों पर विचार कर सकता है। फिलहाल कोई अनुबंध या औपचारिक खरीद घोषणा नहीं हुई है।
अभी स्थिति क्या है
एचएएल के अधिकारियों ने कहा है कि Su-30MKI बनाने के अनुभव के कारण Su-57 उत्पादन के लिए बुनियादी ढांचा आंशिक रूप से उपलब्ध हो सकता है, बशर्ते पर्याप्त तकनीक हस्तांतरण हो। फिर भी अंतिम फैसला राजनीतिक, तकनीकी और औद्योगिक सभी पहलुओं पर निर्भर करेगा।
संक्षेप में, रूस का ऑफर सक्रिय है और भारत ने दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन सरकार ने अभी कोई खरीद या सह-उत्पादन का फैसला नहीं लिया है। प्राथमिकता स्वदेशी AMCA और मौजूदा फ्लीट को मजबूत करने पर बनी हुई है।



