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भोपाल मास्टर प्लान 2047: 21 साल बाद जारी हुआ ड्राफ्ट, जानें शहर के विकास का नया खाका
Veei News
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सितम्बर 29, 2026

मध्य प्रदेश सरकार ने राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक एक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और सुव्यवस्थित महानगर बनाने के लिए ‘भोपाल विकास योजना-2047’ (मास्टर प्लान) का मसौदा जारी कर दिया है। 21 साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस प्रारूप में शहर की 45 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास का नया खाका तैयार किया गया है।
पिछला मास्टर प्लान 1995 में बना था, जिसकी अवधि 2005 तक थी। इसके बाद से शहर के भूमि उपयोग और निर्माण को लेकर वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने यह नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर अगले 30 दिनों तक आम नागरिकों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।
मास्टर प्लान 2047 की मुख्य बातें
- शहर के हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) को 12% से बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव।
- विकास योग्य क्षेत्रफल को 25,351 हेक्टेयर (वर्ष 2005) से बढ़ाकर 61,017.02 हेक्टेयर (करीब ढाई गुना) किया गया।
- निवेश क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर प्रस्तावित, जिसमें 254 गांव शामिल होंगे।
- 51 किलोमीटर लंबा नया ग्रोथ कॉरिडोर बनेगा, जिसमें असीमित एफएआर (FAR) का प्रावधान है।
सड़क की चौड़ाई तय करेगी व्यावसायिक गतिविधियां
रहवासी क्षेत्रों में अनियोजित व्यावसायिक गतिविधियों के कारण होने वाले विवादों और जाम को रोकने के लिए नए मास्टर प्लान में सख्त नियम बनाए गए हैं। अब आवासीय इलाकों में बड़े शोरूम या शॉपिंग मॉल की अनुमति नहीं होगी। व्यावसायिक गतिविधियों को सड़क की चौड़ाई के आधार पर बांटा गया है:
- 12 मीटर से कम चौड़ी सड़क: यहां कमर्शियल गतिविधियां नहीं होंगी। केवल डॉक्टर, वकील, सीए, आर्किटेक्ट जैसी पेशेवर गतिविधियां एक मंजिल तक संचालित की जा सकेंगी।
- 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क: शोरूम, होटल या कैफे नहीं खुलेंगे। सिर्फ बैंक एटीएम, स्टेशनरी और मेडिकल स्टोर जैसी जरूरी सुविधाएं संचालित होंगी।
- 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़क: नर्सिंग होम, सीमित क्षमता वाले रेस्टोरेंट, कोचिंग संस्थान, गाड़ियों की रिपेयर शॉप, कॉल सेंटर, 100 सीट तक के ऑडिटोरियम और शोरूम का संचालन किया जा सकेगा।
- 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क: इन प्रमुख मार्गों पर बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल संचालित किए जा सकेंगे।
51 किमी का ‘ग्रोथ कॉरिडोर’ और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट
शहर को एयरपोर्ट और बाहरी इलाकों से बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए 51 किलोमीटर का एक विशेष ‘ग्रोथ कॉरिडोर’ विकसित किया जाएगा। इसके तहत परिवहन और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव होंगे:
- बीआरटी और मेट्रो: इस कॉरिडोर पर बसों के लिए रिजर्व लेन (BRT) बनेगी, जिसे भविष्य में मेट्रो जैसी सेवा में बदला जा सकता है।
- टीओडी (TOD) कॉन्सेप्ट: ‘ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ के तहत जहां बस या मेट्रो की सुविधा होगी, वहीं आसपास घर, कॉरपोरेट ऑफिस, आईटी/डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और शिक्षा संस्थान बसाए जाएंगे ताकि लोगों को लंबी यात्रा न करनी पड़े।
- डिजिटल ट्विन सिटी: पूरे शहर की निगरानी के लिए एक डिजिटल नक्शा (ट्विन सिटी सिस्टम) बनाया जाएगा, जिससे अवैध निर्माण और जाम जैसी समस्याएं समय रहते पहचानी जा सकेंगी।
हेरिटेज TDR और पुरानी इमारतों का पुनर्विकास
पुराने शहर के निवासियों के लिए मास्टर प्लान में ‘हेरिटेज TDR’ (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) का विशेष प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति ऊंचाई-सीमा के कारण अपने पुराने घर पर नई मंजिल नहीं बना पा रहा है, तो सरकार उसे निर्माण हक का एक प्रमाणपत्र देगी, जिसे वह बाजार में बेच सकेगा। इसके अलावा, पुरानी और जर्जर हो चुकी अपार्टमेंट सोसाइटी में यदि 70% निवासी पुनर्विकास के लिए राजी हों, तो पूरी बिल्डिंग को तोड़कर नया बनाना अब कानूनी तौर पर आसान होगा।
पर्यावरण और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण
इस विकास योजना में भोपाल की पहचान माने जाने वाले भोजताल (बड़े तालाब), वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों के संरक्षण को प्रमुखता दी गई है। इसमें ‘हरित टीडीआर’ का भी प्रावधान है, जिससे ग्रीन बेल्ट में आने वाली जमीन के मालिकों को मुआवजा मिल सकेगा और विकासकर्ताओं को अतिरिक्त निर्माण की सुविधा प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा: “यह योजना भोपाल की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल के संकल्प की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है।”
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