Fact Check: क्या चुनाव आयुक्तों को जजों से भी बड़ा ‘सुरक्षा कवच’ मिला है? जानें सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की सच्चाई

दावा: सोशल मीडिया और समाचार मंचों पर यह दावा किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई (CJI) बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके काम के लिए मिली कानूनी सुरक्षा पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि “जजों को भी इस तरह का सुरक्षा कवच उपलब्ध नहीं है।”
फैक्ट चेक (Fact Check)
पड़ताल में यह वायरल दावा तथ्यात्मक रूप से सही पाया गया है। यह टिप्पणी हाल ही में ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच जब इस मामले की सुनवाई कर रही थी, तब नए कानून के तहत चुनाव आयोग को दी गई कानूनी छूट (Legal Immunity) पर चर्चा हुई।
कोर्ट में किसने की थी यह विशेष टिप्पणी?
चुनाव आयुक्तों की अभूतपूर्व कानूनी सुरक्षा पर चर्चा करते हुए जस्टिस जोयमाल्या बागची ने यह महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी की थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था, “यह सुरक्षा शायद केवल राष्ट्रपति के लिए है। यह जजों पर भी लागू नहीं होती है।” इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने सहमति जताते हुए कोर्ट में कहा कि इस तरह की वैधानिक सुरक्षा तो देश के प्रधानमंत्री के पास भी नहीं है।
क्या है चुनाव आयुक्तों का नया ‘सुरक्षा कवच’?
संसद द्वारा पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 16 के तहत वर्तमान और पूर्व चुनाव आयुक्तों को व्यापक कानूनी छूट दी गई है।
- इसके अनुसार, चुनाव आयुक्तों द्वारा अपनी आधिकारिक ड्यूटी (Official Capacity) के दौरान लिए गए किसी भी फैसले या काम के लिए उनके खिलाफ कोई भी दीवानी (Civil) या आपराधिक (Criminal) कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
- यह विशेष कानूनी सुरक्षा कवच पद छोड़ने या रिटायर होने के बाद भी उनके लिए बना रहता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
सोशल मीडिया और खबरों में चल रहा यह दावा पूरी तरह सत्य है। सुप्रीम कोर्ट ने नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी छूट पर हैरानी जताते हुए माना है कि ऐसा ‘सुरक्षा कवच’ देश के जजों के पास भी उपलब्ध नहीं है। यह ऐतिहासिक टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस जोयमाल्या बागची द्वारा की गई थी।



