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बाबैन: आंगनबाड़ी केंद्र में ‘आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम’ का आयोजन, बच्चों व महिलाओं को किया जागरूक

बाबैन / 29 सितंबर 2026 (सुरेश अरोड़ा): स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र में सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम’ का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला मंत्री रीना सैनी ने शिरकत की और कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर रहा जोर

कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र पर महिलाओं और बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से उपस्थित महिलाओं, बच्चों और अभिभावकों को पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सरकार की जनकल्याणकारी सेवाओं के प्रति जागरूक किया गया। मुख्य अतिथि ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर काम करने का संदेश दिया।

प्रारंभिक बाल्यावस्था का महत्व

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला मंत्री रीना सैनी ने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था के पहले पांच वर्ष बच्चे के सीखने और समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने बताया कि 3 से 5 साल की उम्र में बच्चे का मस्तिष्क सबसे अधिक संवेदनशील और नई चीजें सीखने के लिए अत्यधिक ग्रहणशील होता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा का एक मजबूत आधार इसी आयु में तैयार होता है।

‘कोरे कागज के समान होता है बच्चे का दिमाग’

अपने संबोधन में रीना सैनी ने कहा कि बच्चे का दिमाग एक कोरे कागज की तरह होता है, जिस पर हम जो चाहे लिख सकते हैं और यह प्रभाव उसके मन-मस्तिष्क पर आजीवन बना रहता है। उन्होंने कहा कि बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है और शिक्षा से ही एक सशक्त व सभ्य समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने आंगनबाड़ी व प्ले स्कूल की सभी वर्करों की सराहना करते हुए कहा कि वे छोटे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार देने का उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण अवसर पर महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष चंद्रकांता, बख्तावर सिंह, आंगनबाड़ी वर्कर हेमा रानी, सुमन, सलिन्दर और देवकी सहित कई बच्चों की माताएं व अन्य गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

अनीता शर्मा

एक संवेदनशील और शांत स्वभाव की महिला हैं। घर-परिवार के बीच रहकर उन्होंने ज़िंदगी के छोटे-छोटे पड़ावों को करीब से देखा है। उन्हें सुबह की सैर, घर के आंगन में बैठकर चाय पीना और पुरानी पत्रिकाएँ पढ़ना पसंद है। वे आसपास के लोगों के सुख-दुख को दिल से महसूस करती हैं। उनकी सोच साफ और सीधी है — जो दिखे, वही कहें, बिना बढ़ा-चढ़ाए।

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