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हिमालय संरक्षण के लिए समेकित विकास योजना बनाएं केंद्र और राज्य: मुरली मनोहर जोशी

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और अनियोजित विकास पर चिंता जताते हुए केंद्र तथा हिमालयी राज्यों की सरकारों से संपूर्ण हिमालय के लिए एक समेकित सर्वांगीण विकास योजना बनाने की अपील की है।

जोशी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखे संदेश में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हिमालय क्षेत्र में पर्यावरणीय आपदाओं और विकास कार्यों के कारण जनजीवन संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने बताया कि हिमालय के गांवों से पलायन बढ़ रहा है, निर्माण कार्य प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं तथा सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे टूट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार चेतावनी दे रहा है। हिमालय हमारी संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत है। इसकी उपेक्षा देश के लिए बड़ा संकट बन सकती है। जोशी के अनुसार हिमालय से देश की लगभग 20 प्रतिशत जीडीपी जुड़ी हुई है, इसलिए इसकी रक्षा राष्ट्र की साझी जिम्मेदारी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारें वैज्ञानिकों, भूगर्भशास्त्रियों, भू-वैज्ञानिकों तथा कृषि व जैव विविधता के विशेषज्ञों की रिपोर्टों की अनदेखी कर पर्यटन कार्यक्रमों और विकास योजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं। इससे हिमालय की संधारण क्षमता तेजी से घट रही है।

जोशी ने कहा कि हिमालय केवल पहाड़ी राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण पूरा देश सुरक्षित है। उन्होंने केंद्र और हिमालयी राज्यों से ऐसी योजनाएं बनाने का आग्रह किया, जिनसे हिमालय का संरक्षण हो तथा पर्यावरण, विकास, रक्षा और संस्कृति का संतुलित संवर्धन हो सके। उन्होंने कहा, “हिमालय है तो हम हैं।”

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