छत्तीसगढ़

2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य, भारत बनेगा स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर । भारत ने 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख मीट्रिक टन (5 एमएमटी) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, यह पहल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन भारत को अधिक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। मिशन के तहत वर्ष 2030 तक जीवाश्म ईंधन आयात पर होने वाले कुल खर्च में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए की बचत का अनुमान है। इस मिशन का उद्देश्य केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को भी नई गति देना है। सरकार का अनुमान है कि इस पहल से 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित होगा और विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, अनुसंधान तथा परियोजना विकास जैसे क्षेत्रों में 6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। फैक्टशीट में कहा गया है कि मिशन के तहत निर्धारित मात्रा में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन और उपयोग होने से हर वर्ष लगभग 5 करोड़ टन (50 एमएमटी) कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। इससे भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी। ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए छह राज्यों ने पहले ही समर्पित नीतियां अधिसूचित कर दी हैं। इनमें गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, बिहार और केरल अपनी-अपनी ग्रीन हाइड्रोजन नीतियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने ग्रीन हाइड्रोजन को अपनी मौजूदा औद्योगिक और नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों में शामिल किया है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मोर्चे पर भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ऑस्ट्रेलिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, यूएई और उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न समझौते, आशय-पत्र और संयुक्त घोषणाएं की हैं। इसके अलावा नीदरलैंड्स के साथ नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हस्ताक्षरित किया गया है। भारत और अमेरिका के बीच स्ट्रैटेजिक क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप के तहत एक विशेष इंडिया-यूएस हाइड्रोजन टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन को भारत-अमेरिका नई और उभरती नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्ययोजना (आरईटीएपी) का भी प्रमुख क्षेत्र माना गया है। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए विश्वसनीय प्रमाणन व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से अप्रैल 2025 में ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम ऑफ इंडिया शुरू की गई थी। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) प्रमाणन एजेंसियों को अधिकृत करता है, जबकि जून 2026 में इसके लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल भी शुरू किया गया। सरकार का कहना है कि पारदर्शी और विश्वसनीय प्रमाणन से भारतीय उत्पादकों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। सरकार का लक्ष्य इन प्रयासों के जरिए औद्योगिक क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करना, घरेलू विनिर्माण को मजबूत बनाना और भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूती प्रदान करेगी। –(आईएएनएस)

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