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डूसू चुनाव में NSUI की करारी हार के बाद राहुल गांधी की बैठक, टिकट बंटवारे और संगठन पर मंथन

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 में राष्ट्रीय छात्र संघ भारत (एनएसयूआई) के चारों केंद्रीय पद हारने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संगठन की समीक्षा के लिए बैठक की। 28 सितंबर को 10 जनपथ पर हुई इस बैठक में एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार और एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ मौजूद रहे। बैठक में रणनीति, टिकट बंटवारे, बागी उम्मीदवारों और संगठन की तैयारियों पर चर्चा हुई।

19 सितंबर को घोषित नतीजों के अनुसार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद जीते। उपाध्यक्ष पद एनएसयूआई से जुड़े रहे निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के खाते में गया। एनएसयूआई को 2015 के बाद पहली बार केंद्रीय पैनल में एक भी सीट नहीं मिली।

चुनाव परिणाम क्या रहे

अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास को 24,576 वोट मिले। एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। अंतर 2,053 वोट का रहा।

उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले। एबीवीपी के ईशु मौर्या को 16,910 और एनएसयूआई के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले।

सचिव पद पर एबीवीपी की रिया छाबड़ी को 21,650 वोट मिले। एनएसयूआई की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह को 16,615 वोट मिले। विशेष यादव को 15,778 और एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को करीब 15,206 वोट मिले।

बैठक में किन मुद्दों पर बात हुई

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने हार के बाद जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। टिकट बंटवारे को लेकर सवाल उठे क्योंकि दीपांशु शौकीन और विशेष यादव को टिकट नहीं मिला और उन्होंने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा। शौकीन की बड़ी जीत और यादव का संयुक्त सचिव पद पर दूसरा स्थान एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवारों के वोट काटने वाला माना जा रहा है।

बैठक में अभियान प्रबंधन, आंतरिक मतभेद और छात्र संपर्क को वोट में बदलने की क्षमता पर भी चर्चा हुई। राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के दौरान यह हार हुई, इसलिए युवाओं तक पहुंच पर भी सवाल उठे।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ की भूमिका भी समीक्षा के दायरे में बताई जा रही है। अनुकूल माहौल के बावजूद चारों पद हारने पर संगठन में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया।

बैठक में यह भी कहा गया कि शिक्षण संस्थानों में आरएसएस की उपस्थिति के मुद्दे पर लगातार काम करना होगा। फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी नेता के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है।

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