छत्तीसगढ़

जीरम घाटी के दूसरे जांच आयोग पर रोक के मामले में 21 दिसंबर को अंतिम सुनवाई

धरमलाल कौशिक की याचिका पर हाईकोर्ट का आदेश, हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं को भी पक्ष रखने की अनुमति

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 4 नवंबर। जीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए गठित दूसरे न्यायिक जांच आयोग के कामकाज पर लगी रोक के मामले में छ हाईकोर्ट 21 दिसंबर को अंतिम सुनवाई करेगा। यह सुनवाई विधानसभा के पूर्व स्पीकर धरमलाल कौशिक की उस याचिका पर होगी, जिसमें दूसरे जांच आयोग के गठन को चुनौती दी गई है।

पिछली सरकार ने वर्ष 2021 में जस्टिस प्रशांत मिश्रा के आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए दो सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की अध्यक्षता में नए जांच आयोग का गठन किया था। इससे पहले जस्टिस प्रशांत मिश्रा जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी थी, लेकिन राज्य सरकार ने उसे स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद जस्टिस सतीश अग्निहोत्री और जस्टिस मिनहाजुद्दीन की अध्यक्षता में नए आयोग का पुनर्गठन किया गया।

इस गठन को तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि पूर्ववर्ती जांच आयोग अपनी जांच पूरी कर चुका है, ऐसे में नए आयोग के गठन की आवश्यकता नहीं है। मई 2022 में हाईकोर्ट ने नए आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, जो अब तक प्रभावी है।

इस प्रकरण में जीरम घाटी की घटना से जुड़े एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर राज्य सरकार के नए आयोग गठित करने के अधिकार का समर्थन किया है। हस्तक्षेप याचिका में कहा गया है कि आयोग में रिक्ति होने या नए जांच बिंदु सामने आने पर राज्य सरकार को नया आयोग गठित करने का अधिकार है।

बुधवार को चीफ जस्टिस कृष्णा राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता की अनुपलब्धता के कारण सुनवाई स्थगित करने का आग्रह किया गया। वहीं हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने दलील दी कि नए आयोग को ऐसे जांच बिंदुओं पर जांच के लिए गठित किया गया है, जो पहले आयोग के दायरे में नहीं थे। यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज करने और आयोग की जांच पर लगी रोक समाप्त करने की मांग की।

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