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गरीबी को मात देकर आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं 55 कपड़ा दुकानों से कमा रहीं लाखों रुपये

राजनांदगांव: आर्थिक तंगी और रोजगार की कमी कभी महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती थी, लेकिन आज वही महिलाएं कारोबार के दम पर अपनी पहचान बना रही हैं। हरियाली बहिनी अभियान से जुड़कर महिलाओं ने न केवल गरीबी को मात दी, बल्कि दूसरे जरूरतमंदों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए हैं। जिले में वर्तमान में 55 कपड़ा दुकानों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इन दुकानों से महिलाएं सालाना 50 हजार से लेकर 2.5 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। कभी रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं आज अपने व्यवसाय के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। बैंक से ऋण लेकर कारोबार को विस्तार देने के साथ ही वे स्थानीय बाजार में अपनी पहचान और साख भी बना रही हैं। गरीबी उन्मूलन की दिशा में यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की मिसाल बन रही है।

 नौकरी छूटी तो कारोबार बना सहारा

हरियाली बहिनी अभियान के प्रमुख शिव कुमार देवांगन ने बताया कि लंबे समय तक नौकरी करने के बाद रोजगार छूट जाने से व्यक्ति आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। ऐसी स्थिति में कई बार मजदूरी या कम वेतन वाली नौकरी ही विकल्प रह जाती है। इसी चुनौती को देखते हुए जिन महिलाओं के पास अपना मकान था, उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया। शुरुआत में कृषि केंद्र खोलने की दिशा में पहल हुई। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद कृषि विभाग के सहयोग से महिलाओं ने कृषि केंद्रों का संचालन सीखा और धीरे-धीरे व्यवसाय की बारीकियों को समझा। बाद में उन्हें साड़ी और कपड़ा कारोबार से जोड़कर आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराए गए।

55 दुकानों से दूसरे लोगों को भी रोजगार

इस पहल की खास बात यह है कि महिलाएं अब केवल अपने परिवार तक ही आर्थिक सहयोग सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। दुकान संचालित करने वाली महिलाएं अपने यहां एक-एक व्यक्ति को काम दे रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। महिलाएं कारोबार को और आगे बढ़ाने तथा सालाना आमदनी में वृद्धि करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

 थोक खरीदी से कम कीमत पर कपड़े उपलब्ध

कपड़ा कारोबार को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए एक मुख्य केंद्र से थोक में कपड़ों की खरीदी की जाती है। इसके बाद कपड़े 55 दुकानों तक पहुंचाए जाते हैं। सामूहिक व्यवस्था से दुकानों को कम कीमत पर कपड़े उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। इन दुकानों में आसपास के 15 से 50 गांवों तक के लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। कम दरों पर कपड़े उपलब्ध होने से ग्रामीण ग्राहकों के बीच इन दुकानों की मांग बढ़ी है।छुरिया विकासखंड के ग्राम खोभा निवासी प्रियंका डालेश्वर साहू कपड़ा सेंटर का संचालन कर रही हैं। उन्होंने दो वर्षों में पांच लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। वहीं, अन्य केंद्रों से भी सालाना 50 हजार से एक लाख रुपये तक की शुद्ध आमदनी होने लगी है। कारोबार बढ़ने के साथ मोहला विकासखंड के ग्राम गोटाटोला और छुरिया विकासखंड के ग्राम कल्लूबंजारी में थोक कपड़ा दुकानें भी खोली गई हैं। इससे कपड़ों की आपूर्ति को विस्तार मिला है।

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