देश

वर्ल्ड हार्ट डे: हापुड़ की 32 वर्षीय महिला में गंभीर हृदय रोग मिला, डॉक्टरों ने युवाओं को चेताया

फरीदाबाद: विश्व हृदय दिवस के अवसर पर मेट्रो हॉस्पिटल, फरीदाबाद में सामने आए एक मामले ने एक बार फिर याद दिलाया है कि दिल की बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। हापुड़ की 32 वर्षीय महिला छाती में दर्द और सांस फूलने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची। जांच में उन्हें एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) के साथ डबल-वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज पाया गया।

मामले की जांच मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट विद मल्टीस्पेशलिटी के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. नीरज जैन की देखरेख में हुई।

क्या है एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम

एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम उन स्थितियों का समूह है, जिनमें दिल तक रक्त प्रवाह अचानक कम हो जाता है। इसके लक्षणों में छाती में दर्द, दबाव या बेचैनी, सांस फूलना, पसीना आना, मतली, असामान्य थकान और दर्द का बाजू, कंधे, जबड़े या पीठ तक फैलना शामिल हो सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार, मात्र 32 वर्ष की उम्र में गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज मिलना दर्शाता है कि युवाओं में भी हृदय रोग गंभीर रूप ले सकता है।

डॉ. नीरज जैन की सलाह

डॉ. नीरज जैन ने कहा कि सिर्फ उम्र देखकर दिल की बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “छाती में दर्द और सांस फूलने की समस्या का सही मूल्यांकन होना चाहिए, उम्र चाहे जो भी हो। युवाओं में भी कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो सकती है। लक्षणों को तनाव, एसिडिटी या थकान मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। शुरुआती जांच से बीमारी का पता चलता है और समय पर इलाज संभव होता है।”

महिलाओं में हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान जरूरी

यह मामला महिलाओं के कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य की ओर भी ध्यान खींचता है। महिलाओं में दिल से जुड़े लक्षणों को कई बार कम गंभीर मान लिया जाता है। छाती में दर्द के अलावा बिना वजह थकान, सांस फूलना, पसीना आना, मतली और ऊपरी शरीर में बेचैनी भी हृदय समस्या का संकेत हो सकते हैं।

जोखिम कारक और बचाव

विश्व हृदय दिवस पर विशेषज्ञ जोखिम कारकों की पहचान और कम उम्र से बचाव पर जोर दे रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, तंबाकू सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी प्रमुख कारण हैं। अनियमित खान-पान और परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास भी जोखिम बढ़ाता है।

स्पष्ट जोखिम कारक न होने पर भी लगातार या असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

स्वस्थ जीवनशैली का महत्व

नियमित ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जांच, सही वजन बनाए रखना, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तंबाकू से दूरी दिल की सेहत के लिए जरूरी हैं। परिवार में युवा हृदय रोग का इतिहास होने पर समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

हापुड़ की 32 वर्षीय मरीज का यह मामला विश्व हृदय दिवस पर समय पर चेतावनी है। हृदय स्वास्थ्य की जागरूकता युवावस्था से ही शुरू होनी चाहिए। चेतावनी संकेतों को पहचानना, व्यक्तिगत जोखिम समझना और समय पर चिकित्सा सलाह लेना गंभीर हृदय स्थितियों से बचा सकता है।

संदेश साफ है: दिल की बात सुनें, चेतावनी के संकेतों को पहचानें और उम्र को लक्षण नजरअंदाज करने का कारण न बनने दें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button