छत्तीसगढ़

रायपुर पुलिस की संवेदनशील पहल: मूक-बधिर बच्चों से संवाद के लिए विवेचकों ने सीखी सांकेतिक भाषा, बच्चों ने जाना पुलिस का कामकाज

रायपुर, 08 अक्टूबर 2026 । पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के नॉर्थ जोन पुलिस ने मूक-बधिर बच्चों को पुलिस से सहज रूप से जोड़ने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए संवेदनशील पहल की है। “संकेत से संवाद—संवाद से समाधान” की थीम पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में नॉर्थ जोन के सभी थानों के विवेचकों को सांकेतिक भाषा (Sign Language) का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, कोपल वाणी स्पेशल स्कूल, सेमरिया के मूक-बधिर बच्चों ने पुलिस अधिकारियों से सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद किया और पुलिस कार्यालय व थाना पंडरी का भ्रमण कर पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से जाना।

पुलिस कमिश्नरेट रायपुर द्वारा पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में “संवाद से समाधान” कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस और आम नागरिकों के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में नॉर्थ जोन पुलिस ने ऐसे बच्चों के लिए यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जो सामान्य बोलचाल के माध्यम से अपनी बात व्यक्त नहीं कर पाते हैं।

कार्यक्रम पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन दीपमाला कश्यप के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन आदित्य पांडे, एसीपी पंडरी कृष्ण कुमार चंद्राकर, एसीपी उरला पूर्णिमा लामा और कोपलवाणी से पद्मा शर्मा सहित पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के पहले चरण में नॉर्थ जोन के सभी थानों के विवेचकों को प्रशिक्षकों द्वारा सांकेतिक भाषा की जानकारी दी गई। पुलिसकर्मियों को जरूरी संकेतों के साथ मूक-बधिर बच्चों से व्यवहारिक तरीके से संवाद करने का प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी मूक-बधिर बच्चे के साथ अपराध, दुर्घटना या किसी अन्य घटना की स्थिति में भाषा की बाधा उसकी समस्या समझने में रुकावट न बने। पुलिसकर्मी संकेतों के माध्यम से बच्चे से आवश्यक जानकारी हासिल कर सकें और संवेदनशीलता के साथ उसकी सहायता कर सकें।

इसके बाद कोपल वाणी स्पेशल स्कूल, सेमरिया के मूक-बधिर बच्चों ने डीसीपी नॉर्थ जोन कार्यालय का भ्रमण किया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने बच्चों से सांकेतिक भाषा के माध्यम से बातचीत की। बच्चों ने भी संकेतों के जरिए अपनी बातें साझा कीं। उन्हें पुलिस कार्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं और पुलिस के कामकाज की जानकारी सरल तरीके से दी गई।

इस दौरान बच्चों की प्रतिभा और हुनर को भी पुलिस अधिकारियों ने करीब से जाना। बच्चों ने Vocational Training और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के तहत तैयार किए गए पेंटिंग, आर्ट-क्राफ्ट और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने बच्चों की कलाकृतियों और उत्पादों की सराहना की। बच्चों के हुनर को प्रोत्साहित करने और उनके कौशल को रोजगार एवं स्वावलंबन से जोड़ने के उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों ने उनके बनाए कुछ उत्पादों की खरीदारी भी की।

इसके बाद बच्चों को थाना पंडरी का भ्रमण कराया गया। यहां उन्हें बताया गया कि आम नागरिक अपनी समस्या लेकर पुलिस तक कैसे पहुंच सकते हैं, थाना किस तरह काम करता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस से किस प्रकार सहायता ली जा सकती है। बच्चों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझा और अधिकारियों से संवाद किया।

इस पहल के जरिए नॉर्थ जोन पुलिस ने संदेश दिया कि संवाद केवल शब्दों के माध्यम से ही नहीं होता। यदि कोई बच्चा बोलकर अपनी बात नहीं कह सकता, तो पुलिस की जिम्मेदारी है कि उसके संकेतों को समझने का प्रयास करे। सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण देकर पुलिसकर्मियों को मूक-बधिर बच्चों की समस्याओं को समझने के लिए तैयार करना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पुलिस का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक सुरक्षा और विश्वास का संदेश पहुंचाना है। “संकेत से संवाद—संवाद से समाधान” पहल के माध्यम से मूक-बधिर बच्चों को पुलिस के करीब लाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, प्रतिभा और स्वावलंबन को भी प्रोत्साहित किया गया।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

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