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SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का प्रदर्शन जारी, दिल्ली में करीब 500 हिरासत में

नई दिल्ली/मुंबई, 5 अक्टूबर 2026। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों व युवा संगठनों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। रविवार को दिल्ली में जंतर-मंतर की ओर मार्च रोकने के दौरान पुलिस ने करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया, जबकि मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने संयुक्त मार्च का नेतृत्व किया।

प्रदर्शन की शुरुआत 2 अक्टूबर, गांधी जयंती, से हुई थी। इंडिया गठबंधन की करीब 19 पार्टियों ने 30 सितंबर को बैठक कर 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में “सेव डेमोक्रेसी” मार्च और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर सहमति जताई थी। विपक्ष का कहना है कि 6 अक्टूबर को सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे और नेता राष्ट्रपति से मिलकर मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाएंगे। दिल्ली इकाई 7 अक्टूबर को दिल्ली चुनाव कार्यालय के बाहर संयुक्त प्रदर्शन की योजना भी बना रही है।

विवाद की जड़

विवाद 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद तेज हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। आपत्तियों में उन्हें जानकारी में न रखने, नाम जोड़ने-हटाने और कुछ कदमों को अनधिकृत बताने का जिक्र था। रिपोर्ट के अस्तित्व, तारीखों या सामग्री पर चुनाव आयोग ने विवाद नहीं किया, लेकिन इन्हें संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया।

चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में SIR समेत सभी अंतिम फैसले तीन सदस्यीय आयोग की सर्वसम्मति से हुए। आयोग के अनुसार आंतरिक नोट और अलग राय बहु-सदस्यीय संस्था में सामान्य हैं। 26 सितंबर की बैठक के बाद भी आयोग ने यही रुख दोहराया।

13 करोड़ नामों का दावा

विपक्ष और प्रदर्शनकारी मसौदा सूचियों से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आरोप लगा रहे हैं और इसे मताधिकार से वंचित करने की कोशिश बता रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस दावे को भ्रामक कहा है। आयोग के अनुसार यह आंकड़ा अंतिम सूची से हटाए गए नामों का नहीं, बल्कि मसौदा चरण में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट (ASDD) श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं का है। इनमें करीब 2.8 करोड़ मृत, 3 करोड़ अनुपस्थित या अनट्रेस, 6.3 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित और करीब 1 करोड़ एक से अधिक जगह पंजीकृत लोग शामिल बताए गए हैं।

आयोग का कहना है कि मसौदा सूचियां और संबंधित सूची राजनीतिक दलों व बूथ लेवल एजेंटों को सत्यापन के लिए दी गई हैं। योग्य मतदाता दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। 4 अक्टूबर को आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गलती से छूटे पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाए। SIR का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत और अपात्र प्रविष्टियां हटाना बताया गया है। भाजपा और चुनाव आयोग दोनों ने आरोप खारिज किए हैं कि यह प्रक्रिया सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने के लिए है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सोमवार, 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने याचिकाओं की सुनवाई तय है। याचिकाओं में ज्ञानेश कुमार के निलंबन और कथित रूप से दो अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को रद्द करने की मांग है। एक याचिका में कहा गया है कि फैसले पूरे आयोग के हैं, एक व्यक्ति के नहीं। अलग याचिका में SIR के दौरान कथित वैधानिक उल्लंघन की जांच की भी मांग की गई है।

क्या मांग रहे हैं प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा या हटाना, SIR रोकना और कुछ जगहों पर मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करना हैं। राज ठाकरे ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर की भी मांग की और महाराष्ट्र में SIR रद्द करने की बात कही। उद्धव ठाकरे ने कहा कि संस्थाओं पर नियंत्रण हो सकता है, सड़कें जनता की हैं। हैदराबाद समेत कई शहरों में भी प्रदर्शन हुए। युवा संगठन कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन घोषित किया है।

ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफे की मांग या प्रदर्शनों पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और मतदाता सूची की शुचिता से जोड़ रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाता है और सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को पहले बरकरार रखा है। अंतिम मतदाता सूची दावा-आपत्ति के बाद बनेगी। इस बीच 6 अक्टूबर का मार्च और अदालती सुनवाई अगला बड़ा चरण माने जा रहे हैं।

पंकज कुमार वर्मा

एक शांत और सोचने वाले इंसान हैं। घर का माहौल सादगी भरा रहा। वे सुबह जल्दी उठते हैं, अखबार पलटते हैं और दिन भर देखी गई बातों को याद रखते हैं। दोस्तों के साथ बैठक, लंबी सैर और पुरानी फिल्में देखना उनका शौक है। वे दिखावे से दूर रहते हैं और बात को उसके असली रूप में रखना पसंद करते हैं।

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