CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें तो चुनाव आयोग का काम कौन संभालेगा? जानें नियम और प्रक्रिया

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित कर इस्तीफा देने की पेशकश की है। चुनाव आयोग ने इस पत्र को फर्जी और एआई से तैयार बताया है। आयोग का कहना है कि ऐसा कोई इस्तीफा नहीं दिया गया है और लोगों को ऐसे दस्तावेजों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
विपक्षी दलों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने में कई बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। चुनाव आयोग का पक्ष है कि एसआईआर से जुड़े आदेश तीनों आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी हुए और फॉर्म-6 में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
इस्तीफा कैसे दिया जाता है?
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 11 के अनुसार सीईसी या कोई भी चुनाव आयुक्त किसी भी समय राष्ट्रपति को संबोधित लिखित पत्र देकर पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद पद खाली माना जाता है। इसके लिए कोई निश्चित नोटिस अवधि निर्धारित नहीं है।
पद खाली होने पर काम कौन संभालेगा?
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है। सीईसी के पद पर कोई व्यक्ति न होने से आयोग भंग नहीं होता और न ही उसके काम रुकते हैं। शेष दो चुनाव आयुक्त रोजमर्रा के प्रशासनिक और चुनावी कार्य जारी रख सकते हैं।
कानून में यह व्यवस्था नहीं है कि सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त अपने आप मुख्य चुनाव आयुक्त बन जाएंगे। अनुच्छेद 324(3) के अनुसार अन्य आयुक्तों की नियुक्ति होने पर सीईसी आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन खाली पद पर किसी आयुक्त का स्वतः उत्तराधिकार नहीं होता। नए सीईसी की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
नए सीईसी की नियुक्ति कैसे होती है?
2023 के अधिनियम की धारा 7 के तहत चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। इस समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
इससे पहले विधि मंत्री की अध्यक्षता वाली सर्च कमेटी योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार करती है। चयन समिति इसी पैनल पर विचार करती है, हालांकि वह पैनल से बाहर के किसी योग्य व्यक्ति पर भी विचार कर सकती है। व्यवहार में अक्सर वरिष्ठ चुनाव आयुक्त को ही सीईसी बनाया जाता है, लेकिन यह बाध्यता नहीं है।
ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 से 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी वर्तमान चुनाव आयुक्त हैं। सीईसी को हटाने की प्रक्रिया इस्तीफे से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को, अर्थात सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से।
अभी तक ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया है। वायरल पत्र को आयोग ने आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है। आयोग के कामकाज पर विवाद जारी है, लेकिन संवैधानिक ढांचे के अनुसार सीईसी के पद पर कोई व्यक्ति न होने से चुनाव प्रक्रिया अपने आप रुक नहीं जाती।



