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मुंबई: बिना अनुमति ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकालने पर आयोजकों के खिलाफ एफआईआर, उद्धव-राज ठाकरे ने किया था नेतृत्व

मुंबई पुलिस ने रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाले गए ‘विराट गर्जना मोर्चा’ के आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि यह मार्च आवश्यक अनुमति के बिना निकाला गया।

उपायुक्त मनीष कलवानिया के अनुसार, मामला आजाद मैदान थाने में दर्ज किया गया है। प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा), धारा 189 (विधिविरुद्ध जमाव) और धारा 190 (साझे उद्देश्य के अनुसरण में किए गए अपराध के लिए विधिविरुद्ध जमाव के सदस्यों की जिम्मेदारी) के तहत दर्ज की गई है। फिलहाल इस कार्रवाई पर ठाकरे बंधुओं की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मेट्रो सिनेमा से बीएमसी मुख्यालय तक निकला मार्च

‘विराट गर्जना मोर्चा’ दक्षिण मुंबई में मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) मुख्यालय तक पहुंचा। इसमें हजारों कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राज्य स्तरीय नेताओं ने भी मार्च में हिस्सा लिया। आयोजकों ने पार्टी झंडे नहीं निकालने और केवल तिरंगा लेकर मार्च करने को कहा था।

मार्च मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ था। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग की। राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में हुई एसआईआर को रद्द करने और आगे के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की। उद्धव ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए ‘हथियार’ की तरह काम करने का आरोप लगाया।

भाजपा का पलटवार, शेलार ने कहा ‘कोल्हेकुई मोर्चा’

भाजपा नेताओं ने इस मोर्चे को राजनीतिक स्टंट बताते हुए विपक्ष पर हमला बोला। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि रविवार विश्व पशु दिवस था और इस रैली को ‘गर्जना मोर्चा’ नहीं, बल्कि ‘कोल्हेकुई मोर्चा’ यानी लोमड़ियों का मार्च कहा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाली मानसिकता का आरोप लगाया और कहा कि ये नेता चुनाव हारने के बाद ही चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाते हैं, जबकि पहले उन्हीं मशीनों से जीत हासिल कर चुके हैं।

भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने भी एसआईआर के विरोध पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घुसपैठिए, एक से अधिक जगहों पर नाम वाले मतदाता या मृतकों के नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए या नहीं, यह तय करना जरूरी है। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे नाम तय करेंगे कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कौन बने।

पुलिस की जांच जारी है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्राथमिकी में किन व्यक्तियों को नामजद किया गया है और आगे क्या कार्रवाई होगी।

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