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भारत-फ्रांस 114 राफेल डील: स्वदेशी हथियार इंटीग्रेशन और आत्मनिर्भरता पर बातचीत तेज

भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद पर भारत और फ्रांस के बीच बातचीत जारी है। इस सौदे में भारतीय हथियारों के इंटीग्रेशन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को लेकर चर्चा प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने फरवरी 2026 में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। भारत ने मई 2026 में फ्रांस को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट भेजा था। फ्रांसीसी पक्ष ने अगस्त 2026 में विस्तृत तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव जमा किया है, जिसकी समीक्षा रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना कर रही है। अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।

प्रस्तावित ढांचे के अनुसार कुछ विमान फ्रांस से फ्लाई-अवे स्थिति में आएंगे, जबकि अधिकांश विमान भारत में स्थानीय साझेदारी के साथ बनाए जाएंगे। मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी सामग्री का स्तर चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत की प्रमुख मांग सभी 114 विमानों पर स्वदेशी हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद का इंटीग्रेशन है। इसमें अस्त्र जैसी भारतीय हवा-से-हवा मिसाइलें शामिल हैं। भारत इंटरफेस कंट्रोल दस्तावेजों के जरिए इंटीग्रेशन की व्यवस्था चाहता है, ताकि भविष्य में स्वदेशी सिस्टम जोड़ने में आसानी रहे। पूर्ण सोर्स कोड की मांग नहीं की जा रही है, क्योंकि प्रमुख विमान निर्माता आमतौर पर इसे साझा नहीं करते।

फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने पहले कहा था कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय हथियारों का इंटीग्रेशन सौदे का हिस्सा हो सकता है। हाल ही में फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डोमिनिक टार्डिफ ने कहा कि भारत की संप्रभुता और रक्षा उद्योग में विशेषज्ञता बढ़ाने की इच्छा पूरी तरह सामान्य है। फ्रांस स्वयं संप्रभुता के मामले में संवेदनशील है, इसलिए भारत की आत्मनिर्भरता की जरूरत को समझा जा सकता है।

भारतीय नौसेना के लिए अप्रैल 2025 में हुए 26 राफेल-मरीन विमानों के अंतर-सरकारी समझौते में पहले से ही स्वदेशी हथियारों के इंटीग्रेशन के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का प्रावधान शामिल है। रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की गई है।

सौदा अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है। मूल्य निर्धारण, डिलीवरी समयसीमा, स्थानीयकरण के स्तर और हथियार इंटीग्रेशन की तकनीकी व्यवस्था पर विस्तृत बातचीत बाकी है। दोनों पक्षों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत बना हुआ है और यह प्रस्ताव उसी साझेदारी का हिस्सा है।

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