अलग ड्रोन फोर्स नहीं बनाएगी वायुसेना, एयर चीफ एपी सिंह ने राफेल डील और 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर बताई रणनीति

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्पष्ट किया है कि वायुसेना की अलग से ड्रोन फोर्स बनाने की कोई योजना नहीं है। उनका मानना है कि ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन वायुसेना के मौजूदा ढांचे का ही हिस्सा रहेंगे और इन्हें अन्य हथियार प्रणालियों के साथ एकीकृत करके इस्तेमाल किया जाएगा। अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने राफेल डील, लड़ाकू विमानों की घटती संख्या और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को लेकर वायुसेना की तैयारियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से बात की।
ड्रोन फोर्स पर वायुसेना का स्पष्ट रुख
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई ‘क्रांतिकारी’ बदलाव नहीं, बल्कि एक ‘विकासवादी’ (Evolutionary) प्रक्रिया का हिस्सा हैं। युद्ध के मैदान में अधिकतम प्रभाव के लिए अलग-अलग हथियारों को एक-दूसरे से अलग रखने के बजाय उनके बीच तालमेल बहुत जरूरी है। इसलिए अलग से ड्रोन फोर्स की कोई आवश्यकता नहीं है। वायुसेना इन्हें अपने मौजूदा सिस्टम के साथ जोड़कर संयुक्त अभियानों में इस्तेमाल करेगी।
लड़ाकू विमानों की घटती संख्या पर चिंता और समाधान
भारतीय वायुसेना में फाइटर स्क्वॉड्रन की लगातार कम होती संख्या पर एयर चीफ ने कहा कि स्क्वॉड्रन की क्षमता को संतुलित और मजबूत रखने के लिए वायुसेना को हर साल 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विमानों का उत्पादन तेज करने और आगामी विदेशी समझौतों के जरिए इस कमी को समय रहते पूरा कर लिया जाएगा।
राफेल डील (MRFA) पर बड़ा अपडेट
मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोजेक्ट के तहत 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद पर वायुसेना प्रमुख ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने बताया कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक भारत और फ्रांस के बीच इस महत्वपूर्ण डील को अंतिम रूप दिया जा सकता है। यह सौदा वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में एक बड़ा इजाफा करेगा।
5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और पाकिस्तान की चुनौती
चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करने की पाकिस्तान की कोशिशों को एयर चीफ ने चिंता का विषय माना, लेकिन भरोसा जताया कि भारतीय वायुसेना के पास इससे निपटने की पर्याप्त क्षमता है। उन्होंने स्वदेशी ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अगर AMCA प्रोजेक्ट में अप्रत्याशित देरी होती है, तो वायुसेना को अपनी ताकत और तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है।
वायुसेना प्रमुख का यह बयान यह स्पष्ट करता है कि भारतीय वायुसेना अपनी मौजूदा चुनौतियों से भली-भांति वाकिफ है और स्वदेशीकरण के साथ-साथ आधुनिक सैन्य तकनीक को अपनाने की दिशा में रणनीतिक कदम उठा रही है।



