हर सेकंड कीमती हो, तो क्रिटिकल केयर जागरूकता ही बचा सकती है जान-एमएमआई

रायपुर, 9 अक्टूबर। एनएच एमएमआई हॉस्पिटल सीनियर कंसल्टेंट एवं लीड, इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन के डॉ. प्रदीप शर्मा ने बताया कि आईसीयू ऐसी जगह है, जहाँ कोई भी जाना नहीं चाहता। फिर भी लगभग हर परिवार में कोई न कोई ऐसा होता है, जिसे संक्रमण, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दुर्घटना, बड़ी सर्जरी या ज़हर के कारण आईसीयू में भर्ती करना पड़ा हो। क्रिटिकल केयर उन मरीज़ों के लिए होती है, जिनकी बीमारी में तुरंत इलाज और देखभाल की ज़रूरत होती है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। क्रिटिकल केयर इंटेंसिविस्ट और मल्टीडिसिप्लिनरी टीम द्वारा दी जाती है, जिसमें कंसल्टेंट, नर्स, इमरजेंसी फिजिशियन, रेस्पिरेटरी थेरेपिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट और टेक्नीशियन शामिल होते हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि क्रिटिकल केयर आईसीयू में भर्ती होने से पहले ही शुरू हो जाती है। कुछ बीमारियों के लक्षण ऐसे होते हैं, जिनमें क्रिटिकल केयर की ज़रूरत पड़ती है। जैसे, गंभीर संक्रमण में तेज़ साँस चलना, भ्रम की स्थिति, ब्लड प्रेशर कम होना और पेशाब कम आना देखा जाता है। हार्ट अटैक में सीने में दबाव, पसीना या साँसफूलना हो सकता है। वहीं स्ट्रोक में अचानक चेहरा टेढ़ा हो जाना, हाथ-पैर में कमज़ोरी और बोलने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, ज़रूरी नहीं कि सबसे नज़दीकी अस्पताल में क्रिटिकल केयर की सुविधा हो।


