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भारत ने इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन फिर दोहराया

नई दिल्ली: भारत ने इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट करते हुए दो-राज्य समाधान यानी टू-स्टेट सॉल्यूशन के समर्थन को दोहराया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत का दृष्टिकोण साफ है और वह शांतिपूर्ण समाधान के लिए टू-स्टेट सॉल्यूशन का पक्षधर है।

यह स्पष्टीकरण भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के संदर्भ में आया। 14वीं आईबीएसए त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय बैठक 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित हुई थी। बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा और दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध मंत्री रोनाल्ड लमोला शामिल हुए थे।

संयुक्त बयान में तीनों देशों ने संबंधित संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद प्रस्तावों को लागू करने की बात कही। सभी पक्षों से संघर्षविराम बनाए रखने तथा गाजा पट्टी में पूर्ण और बिना रुकावट मानवीय सहायता पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। अक्टूबर 2025 के संघर्षविराम समझौते के बावजूद गाजा में जारी हिंसा पर गहरी चिंता जताई गई और फिलिस्तीनियों को गाजा से जबरन विस्थापित करने वाली नीतियों को रोकने की मांग की गई।

बयान में उन व्यवस्थाओं पर भी चिंता व्यक्त की गई जो फिलिस्तीनी लोगों के अहरणीय अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकती हैं या कब्जे को वैध बना सकती हैं अथवा उसे लंबा खींच सकती हैं। तीनों देशों ने कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का न्यायसंगत और स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीके से ही संभव है और यह फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों की पूर्ति पर निर्भर करता है।

आईबीएसए देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अरब शांति पहल के आधार पर टू-स्टेट सॉल्यूशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके तहत 1967 की सीमाओं के भीतर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीन राज्य का गठन हो, जो इजरायल के साथ शांति और सुरक्षा के साथ रह सके।

भारत लंबे समय से वार्ता के जरिए दो-राज्य समाधान का समर्थन करता रहा है, जिसमें सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीन राज्य इजरायल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहे।

अनीता शर्मा

एक संवेदनशील और शांत स्वभाव की महिला हैं। घर-परिवार के बीच रहकर उन्होंने ज़िंदगी के छोटे-छोटे पड़ावों को करीब से देखा है। उन्हें सुबह की सैर, घर के आंगन में बैठकर चाय पीना और पुरानी पत्रिकाएँ पढ़ना पसंद है। वे आसपास के लोगों के सुख-दुख को दिल से महसूस करती हैं। उनकी सोच साफ और सीधी है — जो दिखे, वही कहें, बिना बढ़ा-चढ़ाए।

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