पैरोल पर जेल से छूटे 32 कैदी अब भी फरार, हाईकोर्ट ने डीजीपी से तीन सप्ताह में मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 29अक्टूबर।पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद फरार हुए32कैदियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने क्या ठोस कदम उठाए हैं,छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसकी विस्तृत जानकारी मांगी है। स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने पुलिस महानिदेशक(डीजीपी) को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने फरार सभी32कैदियों की मौजूदा स्थिति,उनके ठिकानों और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ हुए पत्राचार का विवरण मांगा है।
मामले में पहले पेश किए गए शपथपत्र के अनुसार,अप्रैल में एक कैदी की गिरफ्तारी के बाद भी36कैदी फरार थे। जुलाई में सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि दो और कैदियों को पकड़कर जेल भेज दिया गया है। इसके बाद फरार कैदियों की संख्या घटकर34रह गई थी।
पुलिस ने विशेष टीमें गठित करने,कैदियों के पुराने पतों और संभावित ठिकानों की जांच करने तथा मुखबिरों से जानकारी जुटाने जैसे कदमों की जानकारी दी थी।
27अक्टूबर को पेश किए गए नए शपथपत्र में बताया गया कि25अक्टूबर2025तक दो और कैदियों को पकड़ा जा चुका था और32अब भी फरार हैं। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि अधिकांश फरार कैदी पड़ोसी राज्यों के रहने वाले हैं।
इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि फरार कैदी पड़ोसी राज्यों में छिपे हो सकते हैं तो वहां उनकी गिरफ्तारी के लिए क्या कदम उठाए गए?शपथपत्र में न तो संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय का स्पष्ट ब्योरा था और न ही सभी32कैदियों की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी।
हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र पेश किया जाए। इसमें सभी फरार कैदियों की स्थिति और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ हुए पत्राचार की प्रतियां भी शामिल हों। मामले की अगली सुनवाई21दिसंबर2026को होगी।


