देश

गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, संयुक्त किसान मोर्चा ने फैसले को बताया अपमान

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026। केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछला MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था। यह बढ़ोतरी करीब 0.97 प्रतिशत है, यानी प्रति किलोग्राम 25 पैसे। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इसे किसानों का अपमान बताया है और सभी रबी फसलों के MSP में तत्काल संशोधन की मांग की है।

फैसला 30 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में लिया गया। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद बताया कि गेहूं की अनुमानित उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है और नए MSP पर लागत के मुकाबले मार्जिन 106 प्रतिशत है। सरकार का कहना है कि यह दर 2018-19 के बजट वादे के अनुरूप है, जिसमें MSP को उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना रखने की बात कही गई थी।

अन्य रबी फसलों में अधिक बढ़ोतरी

गेहूं के मुकाबले दलहन और तिलहन को ज्यादा राहत दी गई है। सरकार का तर्क है कि ऊंचे सरकारी स्टॉक और पिछले सत्र में ज्यादा खरीद के चलते गेहूं में सीमित बढ़ोतरी की गई है, जबकि दालों और तेलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए इन फसलों का समर्थन मूल्य ज्यादा बढ़ाया गया है।

फसल MSP 2026-27 (रुपये/क्विंटल) MSP 2027-28 (रुपये/क्विंटल) बढ़ोतरी (रुपये)
गेहूं 2,585 2,610 25
जौ 2,150 2,286 136
चना 5,875 5,958 83
मसूर 7,000 7,390 390
सरसों/रेपसीड 6,200 6,613 413
कुसुम 6,540 7,215 675

सरकार के आंकड़ों के अनुसार उत्पादन लागत पर अनुमानित मार्जिन गेहूं में 106 प्रतिशत, सरसों में 96 प्रतिशत, मसूर में 92 प्रतिशत, चना में 59 प्रतिशत, जौ में 58 प्रतिशत और कुसुम में 50 प्रतिशत है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गेहूं का स्टॉक जरूरत से कई गुना है और दलहन-तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान संगठनों की आपत्ति

संयुक्त किसान मोर्चा ने 3-4 अक्टूबर को जारी बयान में नए MSP को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मोर्चे का कहना है कि 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी महज 25 पैसे प्रति किलो है और यह खाद्य उत्पादक किसानों का अपमान है। SKM ने सरकार के 106 प्रतिशत रिटर्न के दावे पर सवाल उठाया है। उसका तर्क है कि यह आंकड़ा A2+FL लागत पर आधारित है, जबकि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार व्यापक C2 लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़ा जाना चाहिए।

SKM के अनुसार C2+50 प्रतिशत के हिसाब से गेहूं का MSP 2,744 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम पड़ रहा है और नए दाम पर अंतर करीब 134 रुपये है। मोर्चे ने कुछ गणनाओं में MSP को 3,418 रुपये तक ले जाने की मांग भी रखी है। संगठन ने महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, पंजाब और हरियाणा समेत राज्यों की ऊंची सिफारिशों को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया है। उसने डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और अन्य इनपुट लागत का हवाला देते हुए गांव-गांव में सरकारी आदेश की प्रतियां जलाने का आह्वान किया है।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) ने भी 25 रुपये की बढ़ोतरी को किसानों के साथ क्रूर मजाक बताया है। यूनियन का कहना है कि यह बढ़ोतरी एक प्रतिशत से भी कम है और इससे किसानों को खेती छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उसने भी C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले पर MSP तय करने की मांग दोहराई है।

सरकार का पक्ष

सरकार का रुख है कि गेहूं पर पहले से ही लागत से दोगुने से ज्यादा दाम मिल रहा है और ऊंचे स्टॉक के बीच तेज बढ़ोतरी व्यावहारिक नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी से करोड़ों किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य मिलेगा। आधिकारिक अनुमान के अनुसार 2027-28 विपणन वर्ष में करीब 324 लाख टन खरीद पर किसानों को कुल भुगतान लगभग 90,962 करोड़ रुपये हो सकता है।

गेहूं की बुवाई अगले महीने से शुरू होती है और कटाई अप्रैल से। नया MSP अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले विपणन सत्र पर लागू होगा। किसान संगठनों की मांग और सरकार के फसल विविधीकरण के रुख के बीच यह विवाद रबी सीजन की तैयारी के दौरान जारी रहने की उम्मीद है।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button