छत्तीसगढ़

सात फेरे पर विवाद से हिंदू विवाह अमान्य नहीं

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला पलटा

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 23 अक्टूबर। हिंदू विवाह में सात फेरे होने या न होने को लेकर विवाद मात्र से विवाह को शून्य घोषित नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट करते हुए फैमिली कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया और पति की याचिका खारिज कर दी।

मामला जांजगीर-चांपा जिले के राहौद क्षेत्र के एक युवक और युवती का है। दोनों का विवाह 3 फरवरी 2022 को चिरमिरी के एक शिव मंदिर में हुआ था।

पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि विवाह के दौरान सात फेरे नहीं हुए थे और उससे दस्तावेजों पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे। इसी आधार पर उसने विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की थी।

वहीं पत्नी का कहना था कि विवाह सभी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था और दोनों कुछ समय तक साथ भी रहे थे।

जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए फैमिली कोर्ट का पूर्व फैसला रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत विवाह को शून्य घोषित करने के आधार सीमित हैं। इसके लिए अधिनियम की धारा 5 में निर्धारित अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन होना जरूरी है। इनमें जीवित जीवनसाथी का होना और विवाह के लिए कानूनी पात्रता जैसी शर्तें शामिल हैं।

कोर्ट के अनुसार, केवल विवाह की रस्मों के निर्वहन को लेकर विवाद होने से विवाह अपने आप अमान्य नहीं हो जाता।

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