संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बड़ा खुलासा, मौत से पहले ग्राइंडर से किया था खुद को लहूलुहान

वृंदावन/जबलपुर: संत प्रेमानंद महाराज के दीक्षित शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। घटना के सात दिन बाद वृंदावन पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट की है। 25 सितंबर को रसिक दुलारी शरण ने वृंदावन स्थित श्रीराधा केलिकुंज आश्रम के पास गुरुकृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रोंगटे खड़े करने वाला खुलासा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, इमारत से कूदने से पहले दीपक लोधी ने टाइल्स काटने वाली इलेक्ट्रिक ग्राइंडर मशीन से अपने प्राइवेट पार्ट को काटकर गंभीर रूप से घायल कर लिया था। करीब 40 मिनट तक चले पोस्टमार्टम में यह बात सामने आई है कि मौत का प्रमुख कारण ऊंचाई से गिरने के कारण हुई गंभीर चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव है।
रिपोर्ट में सिर में फ्रैक्चर, रक्त का थक्का जमने और छाती की चार पसलियां टूटकर फेफड़े में धंसने की पुष्टि हुई है। वृंदावन के पुलिस उपाधीक्षक (CO) संदीप सिंह ने बताया कि घटना के बाद चिकित्सकों ने अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए उपचार का हरसंभव प्रयास किया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
जबलपुर के परसवाड़ा में पसरा मातम, परिवार को सता रहे कई सवाल
दीपक लोधी मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गौर के पास परसवाड़ा के रहने वाले थे, जहां उनका बचपन बीता था। आईटीबीपी मार्ग पर स्थित परसवाड़ा में इन दिनों उनके परिवार में भारी मातम है। दीपक के नाना प्रेमलाल पटेल के घर के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है, जहां उनका परिवार निवास करता है। दीपक की मां लोंग बाई अपने बेटे की बचपन की तस्वीर सीने से लगाए गहरे सदमे में हैं।
परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
पिता चेतराम लोधी भी जवान बेटे की मौत से पूरी तरह टूट चुके हैं। परिवार का स्पष्ट कहना है कि वे सीधे तौर पर किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं, लेकिन इस पूरी घटना की एक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिजनों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ था जिसने दीपक को इतना खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
कठौतिया से वृंदावन तक का सफर
दीपक और उनका परिवार मूल रूप से बरगी डूब क्षेत्र के कठौतिया गांव का रहने वाला था। रोजगार की तलाश में पिता के जबलपुर आने के बाद परिवार परसवाड़ा में नाना के घर रहने लगा था। दीपक ने अपनी आठवीं तक की पढ़ाई कठौतिया से पूरी की, जिसके बाद गौर से स्कूली शिक्षा और बरेला से कॉलेज की पढ़ाई की थी। अध्यात्म की ओर झुकाव के चलते वर्ष 2023 में वह पहली बार वृंदावन गए थे, जिसके बाद उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली और उनका नाम रसिक दुलारी शरण हो गया था।



