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फ्लाईदुबई घटना के बाद ओमान को चरमपंथ से जोड़ना बेबुनियाद, सूत्रों का कहना

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में को-पायलट द्वारा कप्तान पर हमले की घटना के बाद ओमान को चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिशें बेबुनियाद बताई जा रही हैं। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि आरोपी व्यक्ति की पृष्ठभूमि की जांच होनी चाहिए, लेकिन उसे ओमान की सरकार या शाही परिवार से जोड़ना उचित नहीं है।

30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। विमान पर सवार लोगों की संख्या रिपोर्टों में करीब 174 से 182 बताई गई है। उड़ान के दौरान को-पायलट ने भारतीय कप्तान स्मित मच्छर पर कॉकपिट में आपात कुल्हाड़ी से हमला किया और विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश की। हमले के बाद विमान तेजी से नीचे गिरा। कप्तान और बोर्ड पर मौजूद अन्य चालक दल के सदस्यों तथा यात्रियों ने आरोपी को काबू किया। विमान को सऊदी अरब के तबूक में आपात लैंडिंग करानी पड़ी। संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने इस घटना को आतंकी कार्रवाई की कोशिश बताया है। जांच अभी जारी है और मकसद पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है।

कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में आरोपी की पहचान ओमानी नागरिक हमाम अल-हम्मामी के रूप में की गई है। इन रिपोर्टों के अनुसार, उसका जन्म संयुक्त अरब अमीरात में ओमानी पिता और सीरियाई मां से हुआ था और उसने अपने जीवन का काफी समय यूएई में बिताया। वॉल स्ट्रीट जर्नल, सीएनएन और एसोसिएटेड प्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ओमान में उसे पहले उड़ान भरने से रोका गया था या ओमान एयर में उड़ान संबंधी भूमिका से हटाया गया था, क्योंकि उसके कथित चरमपंथी विचारों को लेकर चिंता जताई गई थी। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उसने समय सीरिया में बिताया था। ओमान एयर या ओमान सरकार की ओर से इन दावों की सार्वजनिक पुष्टि अभी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं आई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि संदिग्ध ने इस्लामिस्ट कट्टरपंथी विचारधारा का प्रभाव झेला था। यूएई अटॉर्नी जनरल ने हमले को आतंकी कृत्य करार दिया है।

इकनॉमिक टाइम्स से बात करने वाले राजनयिक सूत्रों ने कहा कि आरोपी को ओमान की स्थापना या शाही परिवार से जोड़ना पूरी तरह अनुचित है। सूत्रों के अनुसार, ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का पुराना रणनीतिक और रक्षा साझेदार रहा है और दशकों से संयम की नीति पर चलता रहा है। ओमान में इबादी संप्रदाय प्रमुख है, जिसे तुलनात्मक रूप से उदार माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि ओमान सरकार ने व्यक्तियों या समूहों द्वारा चरमपंथ फैलाने की कोशिशों पर अंकुश लगाया है और किसी ओमानी शाही सदस्य ने किसी विदेशी सरकार के खिलाफ चरमपंथ को बढ़ावा नहीं दिया है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि समाज के एक हिस्से में गाजा या फिलिस्तीन मुद्दे पर राय हो सकती है, लेकिन इससे देश की आधिकारिक नीति को चरमपंथ से नहीं जोड़ा जा सकता। उनका कहना है कि आरोपी के कार्यस्थल, पूर्व नियोक्ता और भर्ती प्रक्रिया की पूरी जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो कि उसे फ्लाईदुबई में कैसे नियुक्त किया गया और इजरायल रूट पर कैसे तैनात किया गया। फिलहाल यह तय नहीं है कि उसने अकेले कार्रवाई की या किसी समूह से उसका संबंध था। जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी काम कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से विमानन क्षेत्र में पायलटों की पृष्ठभूमि जांच और सुरक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। साथ ही, एक व्यक्ति के कथित विचार या कृत्य के आधार पर पूरे देश को चरमपंथ का समर्थक बताना तथ्यों से मेल नहीं खाता। घटना की आधिकारिक जांच पूरी होने तक आरोपों और पहचान को सूत्रों तथा मीडिया रिपोर्टों पर आधारित माना जाना चाहिए।

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