त्योहारों से पहले NHRC का निर्देश: रेहड़ी-फेरी और पटरी वालों को बिना वजह न हटाएं, जरूरी हो तो पहले वैकल्पिक जगह दें

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा के दौरान रेहड़ी-फेरी वाले, पटरी व्यापारी, फेरीवाले और छोटे स्थानीय कारोबारी बिना वजह न हटाए जाएं और उनकी आजीविका बाधित न की जाए। आयोग ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को यह ताजा निर्देश जारी किया।
आयोग ने मुख्य सचिवों से कहा है कि जहां अग्नि सुरक्षा, जन सुरक्षा या आपात मार्ग के लिए जगह खाली कराना अनिवार्य हो, वहां विक्रेताओं की कमाई प्रभावित किए बिना, जितना संभव हो, उपयुक्त और सुलभ वैकल्पिक वेंडिंग स्थान पहले उपलब्ध कराया जाए।
किन लोगों पर लागू होगा निर्देश
निर्देश का दायरा स्ट्रीट वेंडर, फुटपाथ व्यापारी और फेरीवालों तक सीमित नहीं है। इसमें कुम्हार, दीया और मूर्ति बनाने-बेचने वाले, मिट्टी के बर्तन बेचने वाले, छोटे मिठाई विक्रेता, माली (फूल विक्रेता), स्थानीय सब्जी विक्रेता, रंगोली रंग बेचने वाले और इसी तरह के अन्य छोटे कारोबारी व कारीगर भी शामिल हैं।
आयोग का कहना है कि त्योहारों के दौरान इन समूहों को अनावश्यक रूप से विस्थापित, हटाया या उनकी जीविका गतिविधि से रोका नहीं जाना चाहिए। स्थानीय प्रशासन से उनकी पारंपरिक धंधों को सुगम बनाने, आजीविका सुरक्षित रखने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने को भी कहा गया है। यह बात सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल के अनुरूप कही गई है।
सामान जब्ती और उत्पीड़न पर क्या कहा
NHRC ने साफ किया है कि विक्रेताओं का सामान मनमाने ढंग से जब्त न किया जाए और उनके खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई न हो। जहां कार्रवाई जरूरी हो, वह कानून के अनुसार हो और आजीविका के अधिकार का ध्यान रखा जाए। उत्पीड़न, वसूली या अनुचित दखल की शिकायतों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा गया है।
आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि ये आदेश जिला magistrates, नगर निकायों, पुलिस और संबंधित अधिकारियों तक व्यापक रूप से पहुंचाए जाएं और प्रभावी रूप से लागू हों। कुछ रिपोर्टों के अनुसार राज्यों से 18 अक्टूबर तक कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है।
शिकायतों के बाद दोबारा दखल
यह मामला अलग-अलग शहरों में स्थानीय विक्रेताओं और फेरीवालों को बिना वजह हटाने, सामान जब्त करने, जुर्माना लगाने और परेशान करने की शिकायतों से जुड़ा है। पिछले त्योहारी सीजन में आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने ऐसे आरोपों का संज्ञान लिया था और संबंधित राज्यों व स्थानीय प्रशासन से जांच व आवश्यक कार्रवाई कराने को कहा था। इस साल आयोग ने माना कि त्योहारों के दौरान आजीविका और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए दोबारा दखल जरूरी है।
आयोग ने यह भी रेखांकित किया है कि विक्रेताओं के अधिकारों की रक्षा के साथ जन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। निर्देश में मनमानी बेदखली पर रोक है, लेकिन सुरक्षा कारणों से स्थान खाली कराने की जरूरत को पूरी तरह नकारा नहीं गया है। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक जगह देना शर्त के रूप में रखा गया है।



