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अजमेर दरगाह मामले में राजवर्धन सिंह परमार ने पाकिस्तान कोड वाले नंबर से जान की धमकी मिलने का किया दावा

अजमेर। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने दावा किया है कि अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह को मंदिर बताने वाले मामले से पीछे हटने के लिए उन्हें पाकिस्तान के कोड वाले नंबर से जान से मारने की धमकी मिली है। परमार के अनुसार, शनिवार रात करीब 11:54 बजे उनके मोबाइल पर पाकिस्तान कोड वाला कॉल आया। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर कहा कि वे सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बताएं कि अब इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा नहीं करने पर 24 घंटे के अंदर परिवार के किसी सदस्य को जान से मारने की धमकी दी गई।

यह पूरा विवरण अभी परमार का आरोप है। पुलिस या किसी जांच एजेंसी की ओर से कॉल की उत्पत्ति, नंबर की पुष्टि या धमकी देने वाले की पहचान सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गई है। विदेशी कोड दिखने वाला नंबर कॉल स्पूफिंग से भी आ सकता है, इसलिए असली स्थान जांच के बाद ही तय हो सकता है।

पुलिस को सूचना, एनआईए और गृह मंत्रालय से जांच की मांग

परमार ने कहा है कि धमकी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी है। उन्होंने केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से पाकिस्तान कोड वाले नंबर से आई कॉल की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि धमकी देने वाले की पहचान कर कार्रवाई की जाए।

तीन राज्यों में सुरक्षा की मांग

राजवर्धन सिंह परमार ने अपने और परिवार के लिए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने बताया कि उनका गृह जिला उत्तर प्रदेश में है, परिवार दिल्ली में रहता है और दरगाह से जुड़ा मामला राजस्थान में चल रहा है। इन्हीं आधारों पर उन्होंने तीनों जगह विशेष सुरक्षा मांगी है।

2022 से धमकियों और कानूनी लड़ाई का दावा

परमार का दावा है कि वर्ष 2022 से अब तक अलग-अलग नंबरों से उन्हें 12 से अधिक बार धमकियां मिल चुकी हैं। वे अजमेर दरगाह परिसर में प्राचीन शिव मंदिर होने के दावे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके अनुसार मामला अजमेर की निचली अदालत के साथ जयपुर हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मूल याचिका हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की थी और परमार बाद में पक्षकार बने।

विष्णु गुप्ता की याचिका, धमकी और फायरिंग

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अजमेर सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह को संकट मोचन महादेव मंदिर घोषित करने, पूजा का अधिकार देने और सर्वेक्षण की मांग की थी। अजमेर की अदालत ने 27 नवंबर 2024 को याचिका स्वीकार की और दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी किए। अगली सुनवाई 20 दिसंबर 2024 तय हुई थी।

याचिका स्वीकार होने के कुछ दिन बाद विष्णु गुप्ता ने दिल्ली में शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया था कि उन्हें भारतीय और कनाडा के नंबर से धमकियां मिलीं। अलग घटना में 25 जनवरी 2025 की सुबह अजमेर से जयपुर लौटते समय हाईवे पर उनकी कार पर गोली चलाई गई। पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन बाद की रिपोर्टों में चालान और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर प्रगति सीमित बताई गई।

मामला फिर चर्चा में

परमार को पाकिस्तान कोड वाले नंबर से कथित धमकी मिलने के दावे के बाद मामला फिर चर्चा में है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड, नंबर और कथित धमकी की जांच कर सकती हैं। अजमेर दरगाह देश के प्रमुख सूफी श्रद्धास्थलों में है। मंदिर होने का दावा अदालत में विचाराधीन है और अभी किसी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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