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हार के बाद ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं विपक्ष: बृजभूषण शरण सिंह

गोंडा। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी तथा विपक्ष के ईवीएम और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि हार के बाद विपक्ष ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है। बृजभूषण शरण सिंह कैसरगंज लोकसभा सीट से पूर्व सांसद हैं। उनका यह बयान गोंडा में 4 अक्टूबर को आया।

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 2014 से लगातार हार के बाद विपक्ष के प्रदेशों में किले ढहने लगे। जब कोई रास्ता नहीं बचता, तो आरोप ईवीएम या चुनाव आयोग पर मढ़ दिए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि बैलेट पेपर वाले चुनावों में जंगलराज होता था और कुछ लोग गरीबों का हक मारकर पूरे गांव का वोट डाल देते थे। उनके अनुसार, विपक्ष उसी व्यवस्था की वापसी चाहता है।

ईवीएम पर क्या कहा

ईवीएम को लेकर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “ईवीएम से चुनाव 2014 से तो हो नहीं, इसके पहले से हो रहा है। इसके पहले से आपके प्रधानमंत्री बने, आपके मुख्यमंत्री बने हैं। अब जब से आप हारना शुरू किए, तब से आप ये सवाल उठाना शुरू किए।” उन्होंने कहा कि आज इसके अलावा विपक्ष के पास कोई विषय नहीं है।

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, ईवीएम का प्रायोगिक इस्तेमाल मई 1982 में केरल के परावुर विधानसभा क्षेत्र में हुआ था। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन के बाद 1989 से कानूनी आधार बना। 1998 से आंशिक इस्तेमाल बढ़ा और 2004 के लोकसभा चुनाव से सभी 543 सीटों पर ईवीएम का प्रयोग हुआ। इस आधार पर 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव भी ईवीएम से हुए थे। बैलेट पेपर से जंगलराज होने का दावा बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक बयान है।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों पर उन्होंने कहा, “आज आप ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, यहां से बम्बई तक मोर्चा खोले हुए हैं। फिर नवीन चावला कौन थे? उनके साथ आपका क्या रिश्ता था? एमएस गिल कौन थे? उनके साथ आपका रिश्ता क्या था? तो ये सवाल उठाने का हक इनको नहीं है।” नवीन चावला और एमएस गिल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाना सिंह का राजनीतिक तर्क है।

विपक्ष पर हमला

विपक्ष पर हमला बोलते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ये पुनः वही व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें कुछ लोग गरीबों का हक मारें और दबंग लोग इकट्ठा होकर पूरे गांव का वोट डाल दें। उन्होंने दावा किया, “जब निष्पक्ष चुनाव होगा, तब ये जीतेंगे नहीं, तो ये सवाल उठाएंगे, ये सवाल उठा रहे हैं।”

हाल के दिनों में राहुल गांधी ने ईवीएम और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और नियुक्ति व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। बृजभूषण शरण सिंह ने इन आरोपों को हार के बाद संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश बताया है।

नवीन कुमार

झारखंड के परिवेश से जुड़े रहे हैं। पहाड़, जंगल और छोटे कस्बों की जिंदगी उन्होंने करीब से देखी है। परिवार में सादगी और मेहनत का मूल्य सिखाया गया। वे लोगों से मिलना, उनकी बात सुनना और स्थानीय मेलों-त्योहारों में शामिल होना पसंद करते हैं। उनकी पहचान सीधेपन और जमीन से जुड़े रहन-सहन से है।

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