ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 24,800 विद्यार्थियों को डिग्री, पांच शोधार्थियों को पीएचडी

राज्यपाल रमेन डेका की अध्यक्षता में सातवां दीक्षांत समारोह
पद्मश्री डॉ. उषा बारले सहित पांच विभूतियों को सम्मान
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 4 नवंबर। पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय का सातवां दीक्षांत समारोह मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हुआ। राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका की अध्यक्षता में हुए समारोह में विभिन्न शैक्षणिक सत्रों के कुल 24,800 सफल विद्यार्थियों को डिग्री और प्रमाणपत्र देने की घोषणा की गई। शिक्षा, प्रबंधन और भूगोल विषयों के पांच शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक धरमलाल कौशिक और सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी सहित कई जनप्रतिनिधि और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए।
राज्यपाल डेका ने इस मौके पर कहा कि दीक्षांत समारोह नई ऊर्जा और जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने ज्ञान हासिल करना आसान बनाया है, लेकिन युवाओं को इनका इस्तेमाल विवेक और समझदारी से करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उसकी वजह समझकर दोबारा प्रयास करना चाहिए। युवाओं को दूसरों की नकल या तुलना करने के बजाय अपनी प्रतिभा और रुचि के अनुसार रास्ता चुनना चाहिए। अभिभावकों को भी बच्चों पर अपनी पसंद थोपने के बजाय उनकी क्षमता के मुताबिक आगे बढ़ने देना चाहिए। उन्होंने डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने, पेड़ लगाने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने जैसे छोटे प्रयासों से सामाजिक बदलाव लाने की अपील की।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने डिग्रीधारियों से अपने ज्ञान का इस्तेमाल समाज के हित में करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुंदरलाल शर्मा के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय उन लोगों के लिए शिक्षा के अवसर उपलब्ध करा रहा है जो नौकरी या अन्य परिस्थितियों के कारण नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते। नैक से ए प्लस ग्रेड मिलना विश्वविद्यालय की उपलब्धि है। उन्होंने युवाओं से असफलता को चुनौती मानकर लगातार प्रयास करते रहने को कहा।
दीक्षांत वक्ता हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष कैलाश चंद्र शर्मा और नैक अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव ने विद्यार्थियों से अपनी भाषा, बोली और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर गर्व करने तथा भारतीय संस्कृति से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का आह्वान किया।
आदिवासी बच्चों की शिक्षा और विकास में योगदान के लिए पुरुषोत्तम लाल उरांव तथा बस्तर में वन और पर्यावरण संरक्षण के लिए दामोदर कश्यप को पंडित सुंदरलाल शर्मा वनवासी गौरव सम्मान दिया गया। पद्मश्री लोक गायिका डॉ. उषा बारले तथा रामनामी परंपरा के संरक्षण के लिए गुरुमाता सेतबाई रामनामी और गुलाराम रामनामी को संस्कृति रत्न सम्मान प्रदान किया गया।
कुलपति प्रो. वीके सारस्वत ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 32 डिप्लोमा और 68 सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम स्वीकृत किए गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं उभरती तकनीकों का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और शोध संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पंडित सुंदरलाल शर्मा रिसर्च चेयर स्थापित की गई है।
12 नए ऑनलाइन कोर्स और बॉटनी-जूलॉजी में एमएससी शुरू करने की मंजूरी मिली है। विद्यार्थियों की 5707 शिकायतों में से 5686 का समयसीमा में निराकरण किया गया। 913 वीडियो लेक्चर उपलब्ध हैं और 2,65,208 शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिलॉकर पर अपलोड किए गए हैं। पीएम- उषा योजना के तहत शोध और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए 20 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।
समारोह में नई वेबसाइट, परीक्षा रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन पोर्टल और अभ्युदय जर्नल का लोकार्पण किया गया। देवपहाड़ी के एकलव्य विद्यालय के 311 विद्यार्थियों को बैग, स्वेटर और टिफिन सहित शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई।


