छत्तीसगढ़

बार्सिलोना में भारत के स्मार्ट सिटी विजन की गूंज

तोखन साहू ने किया इंडिया पवेलियन का उद्घाटन

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 4 नवंबर। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने 3 नवंबर को स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित स्मार्ट सिटी एक्सपो वर्ल्ड कांग्रेस-2026 में इंडिया पवेलियन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने भारत में शहरी विकास की बदलती तस्वीर, तकनीक आधारित योजनाओं और भविष्य के शहरों के निर्माण की दिशा में हो रहे प्रयासों को वैश्विक मंच पर रखा।

साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का शहरी विकास तेजी से नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। शहरीकरण को सरकार केवल इमारतों, सड़कों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के रूप में नहीं देखती, बल्कि इसे लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बड़े अवसर के रूप में लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शहरों में बेहतर सार्वजनिक सेवाएं, सुगम परिवहन, स्वच्छ वातावरण और प्रभावी प्रशासन जरूरी हैं। भारत का लक्ष्य ऐसे शहर बनाना है जो तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल करते हुए हर नागरिक को बेहतर जीवन दे सकें। यह प्रयास विकसित भारत 2047 के संकल्प से जुड़ा है।

3 से 5 नवंबर तक चल रहे इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में दुनिया के कई देशों की सरकारों, शहरी नियोजन विशेषज्ञों, तकनीकी कंपनियों और निवेशकों की भागीदारी है। यहां स्मार्ट परिवहन, डिजिटल गवर्नेंस, आवास, ऊर्जा दक्षता, जलवायु परिवर्तन से निपटने और आधुनिक शहरी सेवाओं जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश और बिहार की टीमों ने अपने-अपने राज्यों में शहरी विकास, स्मार्ट सिटी समाधान और नवाचार से जुड़ी उपलब्धियां प्रस्तुत कीं। इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए साहू ने कहा कि राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान शहरी विकास को नई गति दे सकता है।

साहू ने संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न देशों के पवेलियन का दौरा किया। उन्होंने फेरा डी बार्सिलोना के मुख्यालय का भी भ्रमण किया और हुडको तथा एनबीसीसी के स्टॉल पर शहरी बुनियादी ढांचे, आवास और निर्माण क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी ली।

उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच भारत को अपनी तकनीकी क्षमता और उपलब्धियां दिखाने के साथ दूसरे देशों से साझेदारी, निवेश और नई तकनीक हासिल करने का अवसर देते हैं। भारत का लक्ष्य सिर्फ स्मार्ट शहर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें टिकाऊ, समावेशी, सुरक्षित और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है।

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