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सुप्रीम कोर्ट ने ही 6 अक्टूबर की बैठक तय की थी, बाद में रद्द कर दी: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जेपीसी प्रमुख पीपी चौधरी

नई दिल्ली। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि 6 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय के साथ प्रस्तावित बातचीत का कार्यक्रम अदालत ने स्वयं तय किया था। न्यायालय द्वारा बैठक रद्द किए जाने के बाद समिति ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया और सदस्यों को सूचना जारी कर दी।

चौधरी ने संवाददाताओं से कहा कि 22 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से समिति के निदेशक को ईमेल भेजकर सूचित किया गया था कि 6 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे बैठक तय की गई है। उन्होंने कहा कि कई सदस्य इस बात से अवगत नहीं थे कि कार्यक्रम अदालत ने ही निर्धारित किया था। बाद में जब अदालत ने बैठक रद्द की, तो समिति ने भी अपना कार्यक्रम रद्द कर सभी सदस्यों को औपचारिक नोटिस भेज दिया।

भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर की दोपहर समिति को लिखकर बैठक रद्द करने की जानकारी दी। संचार में कहा गया कि वरिष्ठ न्यायाधीशों के बीच चर्चा के बाद यह महसूस किया गया कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है, इसलिए प्रशासनिक पक्ष पर इस मुद्दे पर चर्चा करना उचित या वांछनीय नहीं होगा। असुविधा के लिए खेद भी व्यक्त किया गया।

चौधरी के अनुसार, बैठक का सुझाव डीएमके सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन की ओर से आया था। सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर के पत्र के बाद सदस्यों को सूचित किया गया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संबंधित सामग्री अदालत को भेजी और बैठक में शामिल होने वाले सदस्यों व अधिकारियों की सूची भी साझा की गई। चौधरी ने कहा कि करीब आठ-नौ दिन बाद सार्वजनिक रूप से कुछ आपत्तियां उठने के बाद अदालत ने बैठक को उचित नहीं माना, इसलिए समिति ने भी मामले को आगे नहीं बढ़ाया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित बातचीत अनौपचारिक थी और इसे जरूरत से ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए। उनके शब्दों में, यदि दोनों पक्षों के बीच चर्चा हो सके तो ठीक है, न हो तो भी ठीक है। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय समितियों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के बीच संवैधानिक मामलों पर बातचीत के पहले भी उदाहरण रहे हैं, क्योंकि न्यायाधीशों के पास इस क्षेत्र की विशेषज्ञता है।

इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित बैठक को असंवैधानिक बताया था। उनका कहना था कि संविधान में शक्तियों का पृथक्करण स्पष्ट है और किसी विधेयक की संवैधानिकता पर फैसला अदालत करती है, संसद नहीं। सिब्बल ने कहा था कि समिति के सदस्यों का 6 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों से करीब डेढ़ घंटे की बातचीत का कार्यक्रम था। विल्सन ने बाद में प्रस्ताव का बचाव करते हुए कहा कि व्यापक परामर्श की भावना से उन्होंने मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के विचार सुनने का सुझाव दिया था, लेकिन राजनीतिक आपत्तियों के कारण बैठक रद्द हो गई।

समिति के सदस्यों को पहले भेजे गए कार्यक्रम में इस दौरे को ‘लोकल स्टडी विजिट’ बताया गया था, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों के साथ एक साथ चुनाव के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा का उल्लेख था। चौधरी ने पहले कहा था कि दौरे का मकसद सदस्यों को सर्वोच्च न्यायालय और उसकी लाइब्रेरी से परिचित कराना था, क्योंकि कुछ सदस्य कभी वहां नहीं गए थे, और यह विधेयक पर चर्चा के लिए नहीं था। लोकसभा सचिवालय ने 1 अक्टूबर की शाम सदस्यों को दौरा रद्द होने की सूचना दी थी।

संयुक्त संसदीय समिति संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच कर रही है। ये विधेयक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव से जुड़े हैं। सोमवार को समिति की बैठक संसद पुस्तकालय भवन में हुई, जहां सदस्यों ने दोनों विधेयकों पर विचार जारी रखा। चौधरी ने कहा कि समिति विभिन्न पक्षों के विचार सुन रही है और जब सभी सदस्य इस बात पर सहमत होंगे कि जरूरी गवाहियां और राय जुटा ली गई हैं, तब अंतिम रिपोर्ट पेश की जाएगी।

उसी दिन चौधरी ने कहा कि समिति ने प्रमुख मीडिया व्यक्तियों के विचार भी सुने। उनका मानना है कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव हर पांच साल में एक साथ हों, तो सांसद और विधायक विधायी काम पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को राष्ट्रहित में बताया।

अजय यादव

एक सीधे-सादे स्वभाव के व्यक्ति हैं। बचपन से ही अपने आसपास की बातों को याद रखने की आदत रही। परिवार में बड़ों का आदर और मेहनत की सीख मिली। वे सड़कों पर घूमना, बस-स्टैंड और बाजार की हलचल देखना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि असली तस्वीर वही है जो आम दिन में दिखती है, किसी मंच पर नहीं।

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