छत्तीसगढ़

उत्पाती सांड की ट्रैंकुलाईज करने के बाद मौत

दर्जन भर घायल हुए थे, एक अस्पताल में भर्ती

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 7अक्टूबर। मंगलवार को डीडी नगर इलाके में उत्पात मचाने वाले सांड की मौत हो गई है। कल उसे काबू में करने के लिए ट्रैंकुलाइज करने के 2-3 घंटे जीवित रहने के बाद दम तोड़ा। उसके हमले से घायल दर्जन भर लोगों में एक को छोड़ शेष सभी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

मिली जानकारी अनुसार इस सांड ने डीडी नगर के सेक्टर 2, कंचनगंगा 2, बंजारी नगर इलाके में जमकर उत्पात मचाया। रास्ते में जो आया उस पर हमला किया। उसके आतंक से दिन भर इलाके के लोग दहशत में रहे।
इस सूचना पर निगम के जोन 4 के स्वास्थ्य अधिकारी अपनी टीम और काऊ कैचर स्क्वाड के साथ सांड को पकड़ने निकले। उसने पकड़ रस्सी से बांध दिया गया था। कुछ देर बाद वह रस्सी तोड़ने सफल रहा। उसके बाद उसने हमले शुरू किए। करीब 3 घंटे तक सांड के पकड़ में न आने पर जेडएचओ ने ट्रेंकुलाइज करने का फैसला किया। इस सूचना पर डीएफओ जंगल सफारी से संपर्क कर वन विभाग की टीम बुलाई गई। भाठागांव शासकीय पशु चिकित्सालय के डाक्टर डा दिनेश पटेल ने वन विभाग की मदद से सांड को ट्रैकुलाइज किया गया। उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया था। बेहोश सांड को निगम की टीम काऊकैचर वाहन में लेकर टिकरापारा ले गई।

जहां कुछ देर बाद सांड होश में आया तो उसे निगम अमले ने भोजन भी दिया। इसके बाद सांड की मौत हो गई। अंतिम सांस तक वह खूब तड़पता रहा।निगम के जेएचओ ने बताया कि सांड को रेबिज़ हो गया था। संभवतः इसी तकलीफ की वजह से कल वह अनियंत्रित होकर लोगों पर हमला करने लगा था। मृत सांड का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

इधर उसके हमले से करीब एक दर्जन लोगों को हल्की से गंभीर चोटें आई थीं। इनमें एक महिला कल्पना पटेल ( पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष ) को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शेष को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।

दस काउ कैचर फिर भी सड़क पर मवेशी

रहवासी इलाकों, बाजार क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर मवेशियों का झुंड दिखना आम बात हो गई है। रिंगरोड सर्विस रोड के अलावा वीआईपी इलाके और आउटर के वार्ड भी इससे अछूते नहीं हैं। आवारा मवेशियों से होने वाली दुघर्टनाओं को लेकर भी निगम प्रशासन नहीं चेत रहा है। नगर निगम के दस जोन में आवारा मवेशियों की धरपकड़ करने दस काऊकैचर टीम है।
निगम हाईकोर्ट या मुख्य सचिव की फटकार के बाद आवारा पशुओं या कुत्तों को पकड़ने अभियान चलाता है। कुछ दिनों के बाद अभियान बंद कर दिया जाता है। ऐसा ही हाल आवारा कुत्तों को पकड़ने को लेकर भी निगम का रवैया उदासीन बना हुआ है। लगता है उसे डाग बाइट के दर्जनभर घटनाएं होने का इंतजार है।

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