बस्तर दशहरा 2026 में शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, बस्तर दशहरा समिति ने दिया आमंत्रण
रायपुर, 8 अक्टूबर 2026। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा 2026 में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बस्तर दशहरा समिति की ओर से आमंत्रित किया गया है। बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में समिति के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार शाम रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा पर्व में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया और बस्तर की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप उन्हें पागा पहनाकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार जताते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी आस्था, जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत है। इस आयोजन में बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक समरसता की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की संस्कृति छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। बस्तर दशहरा जैसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करती हैं। राज्य सरकार बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, धार्मिक अनुष्ठानों, पारंपरिक आयोजनों और इस वर्ष की तैयारियों की जानकारी दी। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा और 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन होगा।
बस्तर दशहरा की सबसे खास विशेषता यह है कि इसे भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि मां दंतेश्वरी की आराधना और आस्था के महापर्व के रूप में मनाया जाता है। इसकी परंपरा को ऐतिहासिक रूप से चालुक्य नरेश पुरुषोत्तम देव से भी जोड़ा जाता है। बस्तर दशहरा में रथ का विशेष महत्व है और आयोजन के विभिन्न धार्मिक एवं पारंपरिक अनुष्ठानों में स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों की जिम्मेदारियां इस पर्व में परंपरागत रूप से निर्धारित हैं। रथ निर्माण से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजन की व्यवस्थाओं तक स्थानीय समाज की सामूहिक भागीदारी बस्तर दशहरा की सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है।
भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-विधान, जनजातीय परंपराएं और लोक संस्कृति बस्तर दशहरा को देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक आयोजन के माध्यम से बस्तर की जीवंत संस्कृति को करीब से देखने पहुंचते हैं। यह पर्व न केवल सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है, बल्कि बस्तर की लोक कला, परंपराओं और पर्यटन को भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है।
मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में बस्तर सांसद महेश कश्यप, परगनाकरेकोट के मंगलु मांझी, बलराम मांझी, पदम् चालकी, समारू चालकी, डमरू चालकी, लक्ष्मण मांझी सहित अनेक मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन और बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
