नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत लगाई गई एहतियाती हिरासत को रद्द कर दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागु की पीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी खारिज कर दिया जिसमें हिरासत को सही ठहराया गया था। पीठ ने कहा कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर अकेले एहतियाती हिरासत का आदेश नहीं दिया जा सकता। हिरासत प्राधिकारी को अन्य परिस्थितियों और सामग्री पर भी विचार करना चाहिए था।
मुल्ला अफरोज को 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। हिंसा 24 नवंबर 2024 को कोर्ट के आदेश पर मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। पुलिस ने उन्हें हिंसा का प्रमुख आरोपी बताया था। बाद में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन 13 अक्टूबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट ने उनके खिलाफ NSA के तहत हिरासत का आदेश जारी कर दिया। जून 2026 में हाईकोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखा था, जिसके बाद अफरोज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत आदेश, उसकी पुष्टि और हाईकोर्ट के फैसले तीनों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा एहतियाती हिरासत की शक्ति के अवैध प्रयोग पर यह जुर्माना लगाया है।
इस फैसले के बाद ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने कहा कि संभल मामले में कई अन्य लोगों को भी राहत मिल सकती है।