सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह करेगा CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना निर्वाचन आयोग के नाम पर एकतरफा फैसले लिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। पीठ में न्यायमूर्ति जयमल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध किया जाए।
याचिका बिहार के राकेश कुमार सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है। इसमें अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट जारी करने की मांग की गई है। याचिका में CEC से पूछा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत ऐसे कार्य किए हैं, मानो वे अकेले ही उस सामूहिक शक्ति का प्रयोग करने के हकदार हों, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को संस्था के रूप में दी गई है।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?
विकास सिंह ने पीठ के सामने कहा कि बहुसदस्यीय आयोग का उद्देश्य और कानून दोनों यही कहते हैं कि निर्णय सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाएं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके को देखते हुए इस बात पर गंभीर संदेह है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रक्रिया के लिए आयोग ने कोई सामूहिक निर्णय लिया भी था या नहीं।
याचिका में कहा गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के नाम पर उठाए गए कदमों को लेकर कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें एजेंडा और बैठक के कार्यवृत्त में देरी, मतदाता सूची संबंधी प्रक्रियाओं में बदलाव तथा दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना अपीलें दायर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
कानूनी आधार क्या है?
याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला देती है। इसके अनुसार, चुनाव आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग हो तो निर्णय बहुमत की राय के आधार पर लिया जाएगा।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि CEC ज्ञानेश कुमार को मामले के अंतिम निपटारे तक अपने पद के कार्यों से रोका जाए और आयोग का कामकाज अन्य दो चुनाव आयुक्तों के माध्यम से चलाया जाए। साथ ही आयोग के मूल रिकॉर्ड पेश करने और स्वतंत्र जांच का भी अनुरोध किया गया है।
यह मामला चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवाद के बीच आया है। अदालत अब अगले सप्ताह इस याचिका पर विस्तार से सुनवाई करेगी।



