लुवास में 11वें आयुर्वेद दिवस पर विशेष व्याख्यान: आधुनिक विज्ञान से आयुर्वेद को जोड़ने पर जोर

हिसार: लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) में 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली सेल एवं मानव संसाधन प्रबंधन निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘आयुर्वेद: स्वस्थ कल का आधार’ विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय समुदाय को आयुर्वेद की समृद्ध ज्ञान परंपरा, इसके मूल सिद्धांतों और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता से अवगत कराना था।
औषधीय पौधों और स्वास्थ्य संरक्षण पर चर्चा
कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय (खानपुर कलां, सोनीपत) के एमएसएम इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के द्रव्यगुण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. गोपेश कुमार शर्मा ने अपने विचार रखे। उन्होंने आयुर्वेद के विभिन्न आयामों, औषधीय पौधों के महत्व और स्वास्थ्य संरक्षण में आयुर्वेद की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. शर्मा ने आयुर्वेदिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक अनुसंधान से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों का गहराई से अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
मानव एवं पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए अवसर
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अनिश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर मानव और पशु स्वास्थ्य, दोनों ही क्षेत्रों में नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। डॉ. यादव ने छात्रों को भारतीय ज्ञान प्रणालियों के वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आने का आह्वान किया।
सम्मान समारोह एवं धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम की मुख्य आयोजक और लुवास के मानव संसाधन प्रबंधन निदेशालय की निदेशक डॉ. सोनिया सिंधु ने विशेषज्ञ वक्ता डॉ. गोपेश कुमार शर्मा को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन डॉ. विजेयता तिवारी ने किया, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ ही अतिथि वक्ता का परिचय भी कराया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमन सिन्हा ने सभी उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर भारतीय ज्ञान प्रणाली सेल के सदस्यों सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से इसके प्रभावी उपयोग पर सर्वसम्मति से जोर दिया गया।



