सुई धागे से बुन रहीं आत्मनिर्भरता के सपने महिलाओं को मिल रही रोजगार की राह
राजनांदगांव: नवरात्र में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना के बीच नारी शक्ति के सशक्तीकरण की ऐसी पहल भी सामने आ रही है, जो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही है। महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित न रहकर उनके हुनर को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना आज की जरूरत है। राशि वेलफेयर सोसाइटी 210 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना चुकी है। महिला सशक्तीकरण की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ऐसा कौशल प्रदान करना है, जिसके माध्यम से वे अपनी आजीविका के अवसर तलाश सकें और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे सकें।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों और अन्य कारणों से घर या गांव से बाहर जाकर प्रशिक्षण नहीं ले पातीं। ऐसी महिलाओं तक कौशल विकास के अवसर पहुंचाने के लिए संस्था गांवों में ही रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित कर रही है। संस्था की अध्यक्ष संतोषी साहू ने बताया कि उनका प्रयास है कि किसी कारणवश बाहर नहीं जा पाने वाली महिलाओं को उनके घर और गांव में ही प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और स्वरोजगार के माध्यम से महिला सशक्तीकरण में अपनी भूमिका निभा सकें। उनके अनुसार, संस्था के माध्यम से अब तक लगभग 210 से अधिक महिलाओं को को सिलाई मशीन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
सिलाई के हुनर से खुलेंगे कमाई के रास्ते
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को सिलाई की बारीकियों के साथ आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। हुनर के माध्यम से वे कपड़ों की सिलाई, परिधान तैयार करने और स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय की शुरुआत करने की संभावनाएं तलाश सकती हैं। संस्था के सचिव तरुण पटेल ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को इस तरह तैयार करना है, ताकि वे भविष्य में अपना काम शुरू करने के लिए जरूरी कौशल हासिल कर सकें। प्रशिक्षण का संचालन प्रशिक्षिका काजल ने किया। संस्था का प्रयास महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने के अवसर उपलब्ध कराना है।
