ससुर की आत्महत्या मामले में ठेकेदार दामाद को राहत नहीं

हाईकोर्ट ने एफआईआर और आगे की कार्रवाई रद्द करने से किया इनकार
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 15 अक्टूबर।सरगुजा जिले में पंचायत विभाग के ठेकेदार ओमप्रकाश उपाध्याय की आत्महत्या के मामले में आरोपी दामाद पुनीत चतुर्वेदी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने एफआईआर और सत्र न्यायालय में चल रही आगे की कार्रवाई रद्द करने की मांग खारिज कर दी। बेंच ने कहा कि सुसाइड नोट और गवाहों के बयानों में प्रथम दृष्टया ऐसे तथ्य मौजूद हैं, जो आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रखने के लिए पर्याप्त हैं।
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की डिवीजन बेंच ने पुनीत की याचिका खारिज कर दी। पुनीत उत्तर प्रदेश के जौनपुर का निवासी है।
घटना 20 सितंबर 2025 की है। सरगुजा जिले के धौरपुर ग्राम पंचायत भवन में ओमप्रकाश उपाध्याय का शव फंदे पर मिला था। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोप लगाया गया कि पुनीत अपनी पत्नी सोनल को दहेज के लिए प्रताड़ित करता था।
आरोप के अनुसार, पुनीत ने अपनी पत्नी के नाम पर 10 लाख रुपये का कर्ज लिया था और ओमप्रकाश को उसका गारंटर बनाया था। किस्तें जमा नहीं होने पर बैंक अधिकारियों ने ओमप्रकाश पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि इस परेशानी और प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने 13 दिसंबर 2025 को पुनीत के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
पुनीत की ओर से कहा गया कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद था। वर्ष 2023 में उसने उत्तर प्रदेश में एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ शिकायत भी की थी, जिसे वह अपनी पत्नी का मित्र बताता था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जांच में आत्महत्या के लिए उकसाने का ठोस सबूत नहीं मिला।
राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए सुसाइड नोट और गवाहों के बयानों का हवाला दिया। अभियोजन के अनुसार, रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री आरोपों को प्रथम दृष्टया समर्थन देती है, इसलिए एफआईआर और आरोपपत्र के बाद की कार्रवाई रद्द नहीं की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने ध्यान दिलाया कि इसी मामले में एफआईआर रद्द करने की याचिका 4 फरवरी 2026 को पहले ही खारिज की जा चुकी है। उस आदेश को चुनौती दिए बिना दोबारा एफआईआर और आरोपपत्र से जुड़ी कार्रवाई खत्म करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
बेंच ने सुसाइड नोट और गवाहों के बयानों को देखते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य की ओर संकेत करने वाली सामग्री मौजूद है। अदालत ने याचिका खारिज कर दी। अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।



