आशुतोष रांका और सौरव दास को आज नहीं मिली ज़मानत, सीजेपी की रत्ना सिंह ने क्या बताया

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास की ज़मानत को लेकर रविवार को सुनवाई थी, लेकिन उनकी ज़मानत पर कोई फ़ैसला नहीं हो सका.
सीजेपी की लीगल सेल की प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया है, न्यायिक हिरासत से रिहा करने से जुड़े मामले की सुनवाई में जानबूझकर देरी की गई. इससे उन्हें हिरासत में और समय बिताना पड़ सकता है.
रत्ना सिंह ने कहा कि वे रविवार सुबह से मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में मौजूद थीं, जहां दोपहर 12 बजे विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट में सुनवाई होनी थी.
उनके मुताबिक़, सभी ज़रूरी औपचारिकताएं और सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद सुनवाई समय पर नहीं हुई.
उन्होंने आरोप लगाया, स्पेशल एग्जीक्युटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) दोपहर करीब 1.30 बजे पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन शाम 5 बजे तक कोर्ट रूम में नहीं आए.
रत्ना सिंह का कहना है कि मजिस्ट्रेट के आने के बाद भी सुनवाई का केंद्र यह नहीं रहा कि सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए आवश्यक शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं.
उनके मुताबिक़, कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद मजिस्ट्रेट ने कहा कि उन्हें एक धमकी भरा संदेश मिला है और इसके बाद पूरी चर्चा उसी संदेश के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई.
रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय रणनीति के तहत चलाई गई और रिहाई से जुड़े मूल मुद्दे पर सुनवाई नहीं की गई.
उन्होंने कहा कि जिस तरह मामले को टाला गया और हैंडल किया गया, उससे वे बेहद निराश हैं.
उनका कहा, प्रक्रियागत देरी की वजह से उनके दोनों साथियों को हिरासत में और समय बिताना पड़ सकता है.
हालांकि, एसईएम कोर्ट की कार्यवाही और कथित धमकी भरे संदेश को लेकर कोई आधिकारिक बयान या आदेश जारी होने की सूचना नहीं है.
गौरतलब है कि आशुतोष रांका और सौरभ दास को 14 अक्तूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया था. दोनों पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए जंतर-मंतर पहुंचने का आरोप है.(bbc.com/hindi)

