छत्तीसगढ़

राहुल गांधी के ‘सत्याग्रह’ की तारीफ के बाद चिराग पासवान ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- मुद्दे बीच में छोड़कर भ्रम फैलाते हैं

रायपुर, 4 अक्टूबर। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने रविवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘सत्याग्रह’ के नाम और लोगों को अपनी बात रखने का मंच देने की सोच की सराहना की। इसके तुरंत बाद उन्होंने विपक्ष पर ईवीएम से लेकर एसआईआर तक मुद्दे उठाकर उन्हें बीच में छोड़ देने और जनता में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।

पासवान ने रायपुर में संवाददाताओं से कहा कि युवाओं और नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए अधिक से अधिक मंच मिलना अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा ऐसी व्यवस्था की वकालत की है और इसी सोच के साथ राहुल गांधी ने ‘सत्याग्रह’ शुरू किया है। नाम का चयन भी अच्छा है।

उन्होंने आगे कहा, “नाम तो अच्छा चुना गया है, लेकिन विपक्ष की आदत हो गई है कि वे बार-बार झूठ और भ्रम फैलाते हैं। मुद्दों को उठाना और फिर उन्हें बीच में ही छोड़ देना, ईवीएम से लेकर एसआईआर तक हर चीज को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाना। असलियत यह है कि जनता आपको नकार रही है। यह बात आपको सत्याग्रह से नहीं, आत्ममंथन से समझ आएगी।”

एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पासवान ने विपक्ष पर चुनिंदा आलोचना का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जहां विपक्ष चुनाव जीतता है, वहां एसआईआर सही माना जाता है, और जहां एनडीए की सरकार बनती है, वहां अनियमितताओं के आरोप लगाए जाते हैं। तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां मुख्यमंत्री विपक्षी दलों के हैं और एसआईआर को सही माना जाता है।

पासवान ने कहा कि सत्याग्रह एक अच्छा विचार है, लेकिन इसके सिद्धांतों का पालन भी होना चाहिए। विपक्ष को बार-बार झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करने के बजाय सच बोलना चाहिए।

क्या है ‘सत्याग्रह’ प्लेटफॉर्म

राहुल गांधी ने शनिवार, 3 अक्टूबर को ‘सत्याग्रह’ डिजिटल मंच शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में अलग-अलग मुद्दों पर चल रहे विरोध और संघर्षों को एक जगह लाना है। लॉन्च के दौरान उन्होंने जेन-जी, छात्रों, किसानों, आदिवासियों, दलितों और महिलाओं का उल्लेख किया था और कहा था कि अकेले उठने वाली आवाज अक्सर दब जाती है। उन्होंने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए सत्य को सबसे बड़ा हथियार बताया था और लोगों से मंच पर अपने आंदोलन दर्ज कराने की अपील की थी।

पासवान का यह बयान उसी पहल पर प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम और एसआईआर को लेकर पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष इन्हें चुनिंदा आलोचना बताता रहा है।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

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