अमिताभ ने सुबह 4 बजे आलोचकों के लिए पोस्ट की एक लंबी धमकी, क्या हो गया है उन्हें?

छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क
रायपुर, 2 नवंबर.भारतीय फिल्मों के आज के सबसे चर्चित, सबसे वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन पिछले कई महीनों से ट्विटर पर रहस्यमयी अंदाज में कई निरर्थक बातें लगातार लिख रहे हैं, उनका मतलब निकलना बड़ा मुश्किल होता है. अब कुछ घंटे पहले, सुबह 4:00 बजने के भी पहले उन्होंने एक बहुत लंबा ट्वीट एक्स पर पोस्ट किया है. अपने सामान्य अंदाज में उन्होंने ट्वीट का नंबर भी डाला है. वे न्यूज़ 18 की किसी बात से आहत लग रहे हैं. अभी हमको पूरा प्रसंग तो नहीं मालूम है, लेकिन शायद दूसरे लोग जिन्होंने उनके बारे में लिखी गई कुछ बातें पढ़ी हों, वे इसका अधिक मतलब निकाल सकेंगे. हम नीचे उनका ट्वीट ज्यों का त्यों दे रहे हैं. हो सकता है इससे लोगों को उनकी मानसिक स्थिति का अंदाज भी लगे. -संपादक
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कृष्ण कन्हैया के लिए, प्रार्थना स्वरूप, अक्सर उचारण करते है –
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की
और मीडिया उसका निरादर करके, अपना प्रचार करने के लिए, छापता है, देखिए ये अमिताभ अपने विरोधियों को चुनौती दे रहा है, की, ले आओ हाथी घोड़ा हम अपने हथियारों से लड़ेंगे, डरेंगे नहीं !
एक तो घोर निंदा एक जय श्री कृष्ण के उपलक्ष्य में , और दूसरा , शब्दों को पलट कर विरोधियों को चुनौती देने की बात कर रहे है ।।
सुन लो कान फाड़ के मीडिया वालो ।। 50 million की आबादी है हमारे followers की मीडिया वालो। जिस दिन हमने इशरा किया, तो उनमें से केवल 10 प्रतिशत ही, ठोकने के लिए तैयार बैठें हैं ।
तुम जितनी हमारे शब्दों की उलट पलट करके निंदा करोगे, उससे १०० गुना ज़ादा करने की क्षमता हमारे Ef के पास पड़ी है । ।। बस बोलने की देरी है उन्हें ।।
ये देखिए मीडिया क्या छापता है :
अमिताभ बच्चन ने विरोधियों की धमकी पर कसा तंज, क्रिप्टिक पोस्ट लिखकर निकाली भड़ास- जाओ, ले आओ अपने हाथी घोड़े
News18 Hindi ये देखा आपने – धर्म का निरादर, और बेतुका (Betuka) Absurd, nonsensical, or silly.
हास्यास्पद (Hasyaspad) Ridiculous or laughable (invoking derision). असंगत
ये वो हैं जिन्हें देश का 5th Column माना जाता है – 4 column तो हमारे संस्कारों में माना जाता है, आदर सम्मान के साथ ।। एक छटा इस लिए कहा जाता है , क्यूँकि उन्हें देशवासियों की और से सम्मानित, और एक समाज में आदार रूपी दर्जा दिया जाता है !!
सम्मान ???
इससे बड़ा हासपद नहीं हो सकता … .
हमसे कोई ग़लती हो जाए – ग़लतियाँ हो जाती हैं – तो हम तुरंत क्षमा माँगते हैं, और सुधार करने का प्रयत्न करते हैं ..
पर यहाँ लगता है उनका ये जन्म सिद्ध अधिकार है …
मैं कहने वाला था एक पीड़ित व्यक्ति का, स्नेह प्यार, जा रहा हूँ निद्रा के लिए
लेकिन पीड़ित नहीं कहूँगा – अपनी पीड़ा का अधिकार केवल मेरा है – वो आपके { मीडिया ] लायक़ नहीं है …
शुभ रात्रि मेरे प्यारे

